Naveen Krishi Sankalp Abhiyan Dhand: नवीन कृषि संकल्प अभियान का दूसरा पड़ाव कल ढांड में, विधायक सतपाल जांबा सिखाएंगे वैज्ञानिक खेती के गुर
कैथल/ढांड /07 जुलाई 2026/अटल हिन्द ब्यूरो
भारतीय कृषि व्यवस्था में अन्नदाताओं की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बंपर पैदावार हासिल करना नहीं, बल्कि फसल को बाजार तक सुरक्षित पहुंचाना और उसकी बर्बादी को रोकना है। किसानों की इसी बुनियादी जरूरत और आर्थिक उन्नति को ध्यान में रखते हुए, कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिन्दल के विजन से शुरू हुए ‘नवीन कृषि संकल्प अभियान’ का दूसरा कारवां बुधवार यानी 8 जुलाई को ढांड पहुंचने जा रहा है।
अनाज मंडी के पास स्थित राधा कृष्ण धर्मशाला में सुबह ठीक 9:30 बजे इस विशेष कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इस अभियान को लेकर क्षेत्र के किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पुंडरी के विधायक सतपाल जांबा शिरकत करेंगे। विधायक जांबा का इस मंच पर होना बेहद खास है, क्योंकि वे स्वयं राजनीति के साथ-साथ मिट्टी से जुड़े रहे हैं और प्राकृतिक खेती का गहरा जमीनी अनुभव रखते हैं।
जब नीति और जमीनी अनुभव मिलेंगे एक साथ: किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
आमतौर पर राजनीतिक या सामाजिक अभियान केवल दावों और भाषणों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन ‘नवीन कृषि संकल्प अभियान’ को धरातल पर पूरी तरह व्यावहारिक बनाने की कोशिश की जा रही है। पुंडरी के विधायक सतपाल जांबा ने खुद प्राकृतिक खेती का विधिवत और कड़ा प्रशिक्षण लिया हुआ है और वे लंबे समय से इसे प्रमोट कर रहे हैं।
ऐसे में ढांड और आसपास के गांवों से जुटने वाले अन्नदाताओं को एक जनप्रतिनिधि से कहीं ज्यादा, एक अनुभवी साथी किसान के अनमोल व्यावहारिक सुझाव सुनने को मिलेंगे। कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिक और नवीन जिन्दल फाउंडेशन की विशेष तकनीकी टीम संयुक्त रूप से किसानों को वैज्ञानिक तरीके से अन्न भंडारण (Scientific Grain Storage) की बारीकियां सिखाएगी, ताकि नमी, सीलन या कीड़ों की वजह से किसानों की खून-पसीने की गाढ़ी कमाई बर्बाद न हो।
अन्न की बर्बादी रुकेगी, तभी समृद्ध होगी किसान की जेब: रविन्द्र धीमान
कैथल कार्यालय प्रभारी रविन्द्र धीमान ने अभियान के व्यापक उद्देश्यों और सांसद नवीन जिन्दल की सोच को रेखांकित करते हुए कहा:
“सांसद नवीन जिन्दल का यह दृढ़ विश्वास है कि जब तक हमारा किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखने और सही समय पर बेचने की तकनीक में आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक उसकी आय को बढ़ाने का सपना अधूरा रहेगा।”
रविन्द्र धीमान ने आगे जोड़ा, “यदि किसान सही तकनीक से अनाज का भंडारण करना सीख जाए, तो न केवल देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि बाजार में मंदी या मंदी के दौर में किसान को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने की मजबूरी भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। वह सही दाम मिलने पर ही अपनी फसल बाजार में ला सकेगा।”
इसी दूरगामी सोच के तहत इस अभियान को पूरे कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। बुधवार को ढांड में होने वाले इस दूसरे महा-कार्यक्रम में भारी संख्या में प्रगतिशील किसानों के अलावा कृषि विशेषज्ञ, पंच-सरपंच और क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक हिस्सा लेंगे, ताकि इस कृषि क्रांति की बयार को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाया जा सके।

