एक्टर बनने की राह में सबसे बड़ा मुकाबला बाहरी दुनिया से नहीं होता-योगेश
सबसे पहले आपको खुद के अंदर उठने वाले सवालों और डरों से लडऩा पड़ता है-योगेश
नरवाना 24 अप्रैल ( नरेन्द्र जेठी)
दुनिया जिसे ग्लैमर कहती है, उसके पीछे कितनी मेहनत और कितने अपनों के विरोध की दीवारें होती हैं, इसे नरवाना के युवा कलाकार योगेश गर्ग से बेहतर कौन समझ सकता है। अपनी अदाकारी के दम पर आज योगेश ने नेशनल टेलीविजन के सबसे बड़े मंच ज़ी टीवी पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। नरवाना के योगेश वर्तमान में चर्चित धारावाहिक ‘गंगा माई की बेटियाँ’ में शो की शुरुआत से ही बबलू बैटरी का एक बेहद अहम और मज़ेदार किरदार निभा रहे हैं।
एक कलाकार की असली जंग योगेश की जुबानी
अक्सर लोग स्क्रीन पर चमकते चेहरे को देखते हैं, लेकिन योगेश उस पर्दे के पीछे की असली जंग को बयां करते हुए कहते हैं कि एक्टर बनने की राह में सबसे बड़ा मुकाबला बाहरी दुनिया से नहीं होता। सबसे पहले आपको खुद के अंदर उठने वाले सवालों और डरों से लडऩा पड़ता है। फिर जंग शुरू होती है अपनों से, जिन्हें आपके सपनों पर यकीन दिलाना सबसे मुश्किल काम है। बाहरी दुनिया और कंपीटीटर्स तो बहुत बाद में आते हैं, उनसे पहले तो समाज के तानों और हालातों से दो-दो हाथ करने पड़ते हैं। शिक्षा और कला का तालमेल योगेश की सफलता की नींव जितनी मज़बूत उनकी कला है, उतनी ही ठोस उनकी शिक्षा भी है।
उन्होंने अपनी 10वीं की पढाई एमडीएन पब्लिक स्कूल, नरवाना से और 12वीं (कॉमर्स) स्ष्ठ पब्लिक स्कूल, जींद रोड, नरवाना से पूरी की। शिक्षा के प्रति समर्पित योगेश ने कॉमर्स में अपनी मास्टर डिग्री (एम कॉम) भी हासिल की है, जो यह साबित करता है कि एक कलाकार शिक्षित होकर और भी बेहतर ढंग से अपनी बात रख सकता है। कॉलेज थिएटर से नेशनल स्क्रीन तक योगेश का यह सफरनामा उनके कॉलेज के थिएटर और युवा उत्सवों (यूथ फैटिवल) से शुरू हुआ। ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन के दौरान कॉलेज के मंचों पर की गई कड़ी मेहनत ने ही उनके भीतर के बबलू बैटरी को जन्म दिया।
आज नेशनल टीवी पर मुख्य नायक के जिगरी दोस्त के रूप में उनकी कॉमिक टाइमिंग और देसी अंदाज दर्शकों को खूब गुदगुदा रहा है। शो के पहले एपिसोड से ही योगेश अपनी अदाकारी से दर्शकों का ध्यान खींचने में सफल रहे हैं।नरवाना में खुशी की लहर कोरोना काल की मंदी और बाहरी दुनिया की प्रतिस्पर्धा को पीछे छोडते हुए योगेश ने साबित कर दिया कि अगर इरादा पक्का हो, तो मंजिल मिल ही जाती है। उनकी इस उपलब्धि पर उनके परिवार और मित्र मंडली में जश्न का माहौल है। योगेश अपनी इस सफलता का श्रेय माता-पिता के आशीर्वाद और उन दोस्तों को देते हैं जिन्होंने कॉलेज के दिनों से उनके इस सफरनामे में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया।
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