उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने राजसमंद जिले के हमेरपाल तालाब पर किया दीपदान और महाआरती
—भक्ति गीतों, दीपों की रोशनी और श्रद्धा से धर्ममय हुआ वातावरण, श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में किए दर्शन
—वंदे गंगा अभियान बना जनआस्था और जनभागीदारी का महाअभियान, जल संरक्षण को जन-जन से जोड़ना समय की आवश्यकता— उपमुख्यमंत्री
जयपुर/ 27 मई/अटल हिन्द ब्यूरो /दिनेश जांगिड़
राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ क्षेत्र के ग्राम तलादरी स्थित ऐतिहासिक हमेरपाल तालाब बुधवार शाम आस्था, श्रद्धा और संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बना, जब उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने वंदे गंगा (जल संरक्षण जन अभियान) के अंतर्गत तालाब पर दीपदान, पूजा-अर्चना एवं महाआरती में सहभागिता निभाई।
सैकड़ों दीपों की जगमगाहट, गूंजते भक्ति गीतों और गंगा मैया के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय और अलौकिक हो उठा। ग्रामीणों, महिलाओं एवं युवाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने आयोजन को जनआस्था के उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम से पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. बैरवा ने हमेरपाल तालाब परिसर स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में विधिवत दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम वर्षा की कामना की।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक स्वागत किया तथा धार्मिक अनुष्ठानों में उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। ग्रामीण महिलाओं ने मंगल गीतों एवं भक्ति धुनों के साथ आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की संस्कृति में जल केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और आस्था का आधार है। हमारे पूर्वजों ने कुएं, बावड़ियां, तालाब और जल स्रोतों को पूजा के रूप में संरक्षित किया और यही परंपरा आज भी समाज को प्रकृति से जोड़ने का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में वंदे गंगा अभियान प्रदेशभर में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य कर रहा है। पिछले दो वर्षों से अभियान के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और जनजागरण के अनेक कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को जल बचाने का संकल्प लेना होगा। पुराने कुएं, बावड़ियां, तालाब और पारंपरिक जल संरचनाएं हमारी धरोहर हैं, जिनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के साथ-साथ अधिकाधिक वृक्षारोपण भी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि पेड़ और पानी दोनों प्रकृति के संतुलन के आधार हैं। जब समाज जागरूक होकर अभियान से जुड़ता है, तब ही स्थायी परिवर्तन संभव होता है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे गंगा अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक अभियान बन चुका है। प्रदेशभर में आमजन, युवा, महिलाएं और विभिन्न सामाजिक संगठन सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा आने वाली पीढ़ियों को इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।


