AtalHind
अंतराष्ट्रीय विचार /लेख /साक्षात्कार

रूस और यूक्रेन युद्ध को भड़काने में अमेरिका अब्बल

रूस और यूक्रेन युद्ध को भड़काने में अमेरिका अब्बल ,रूस, यू,एन,ओ के मानव अधिकार परिषद से बर्खास्तl

लेखक -संजीव ठाकुर

 

रूस और यूक्रेन युद्ध ने अब बड़ा भयानक और वृहद रूप ले लिया है। अमेरिका सहित यूरोपीय देश युद्ध रोकने की बजाय यूक्रेन को अस्त्र शस्त्र की आपूर्ति कर और भड़काने में लगे हुए हैं।
तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए विश्व युद्ध की संभावना से कतई इंकार नहीं किया जा सकता। रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉनसन बोरिस के बयानों से और अधिक क्रुद्ध होकर यूक्रेन पर ताबड़तोड़ हमले का आदेश दे दिया है। उधर संयुक्त राष्ट्र संघ में रूस के कमांडर अजातबेक द्वारा यूक्रेन के बुचा शहर में किए गए तथाकथित तौर पर 400 से ज्यादा नागरिकों लोगों की हत्या और नरसंहार की कड़ी भर्त्सना करते हुए संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार समिति की आपात बैठक बुलाकर रूस को इस समिति की सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है इस जनमत में 93 देशों ने रूस का विरोध कर विपक्ष में वोट डाले, 24 देशों ने रूस का समर्थन किया और भारत सहित 56 देशों ने वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया। भारत में इस भयानक नरसंहार की आलोचना करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ से एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराने की मांग की है। बूचा शहर में हुए नरसंहार की पूरे विश्व के देशों ने कड़ी निंदा कर यूनाइटेड नेशंस से अपील की थी कि उस पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं। यूक्रेन के शहर बूचा में इस बड़े नरसंहार का आरोपी कमांडर अजातबेक इस हमले के बाद से वहां से भागकर रूस आ गया है और वहां की सेना भी वापस लौटकर इधर उधर हो गई है। इस कमांडर को सबसे निर्दयी तथा क्रूर नरसंहारकर कमांडर माना जाता है। उसे 2014 में रूस में सेना का विशिष्ट सेवा मेडल भी प्रदान किया गया था। इस कमांडर की छवि एक खतरनाक मानवाधिकार विरोधी व्यक्ति के रूप में विख्यात है ।रूस पर मानवाधिकार परिषद की सदस्यता पर प्रतिबंध लगाने के पूर्व लीबिया पर 2011 में प्रतिबंध लगाया गया था 11 साल बाद अब रूस पर यह प्रतिबंध लगाया गया है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस ,ऑस्ट्रेलिया ,कनाडा, इटली और अन्य यूरोपीय देशों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध अपराधी घोषित कर उन पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में प्रकरण चलाएं जाने पर जोर दिया है। उल्लेखनीय है की पुतिन किसी भी तरह युद्ध रोकने की मानसिकता के लिए तैयार नहीं है। दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की भी युद्ध के लिए अड़े हुए हैं। आज की स्थिति में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी ,फ्रांस ,इजरायल और अन्य देश यूक्रेन को लड़ाकू विमान, तोपें,मशीन गन और अत्याधुनिक हथियारों की पूर्ति से युद्ध की आग में घी का काम कर दिया है। यूक्रेन ने भी रूस के अंदर घुसकर उनके तेल डिपो को नष्ट करने का दावा भी किया है,जिससे रूस की सेना और उनके सुप्रीम कमांडर नाराज होकर यूक्रेन की राजधानी सहित अन्य शहरों में लगातार विनाशक आक्रमण कर रहे हैं। वैसे पूरी दुनिया भारत और रूस के अच्छे संबंधों को देखते हुए यह आशा लगाए हुए हैं कि भारत इस युद्ध में मध्यस्थता कर युद्ध को रोकने में तथा वैश्विक शांति बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। भारत इस महत्वपूर्ण भूमिका को जरूर निभाना चाहेगा पर बड़ा सवाल यह है कि भारत की बताई गई शांति नीति पर रूस और यूक्रेन किन परिस्थितियों में कितना सहमत होते हैं, इस बात पर यूक्रेन रूस युद्ध का भविष्य निर्भर करेगा । इस नई सदी में यूक्रेन के शहर बूचा में हुए नरसंहार की घटना बड़ी ही अमानवीय, हृदय विदारक है जो हर परिस्थिति में निंदनीय है और इस घटना की पुनरावृत्ति ना हो इसके प्रयास विश्व के सभी राष्ट्रों को सतत करना चाहिए। इस युद्ध में अमेरिका तथा यूरोपीय देशों द्वारा अत्याधुनिक हथियारों की पूर्ति को दृष्टिगत रखते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि यूक्रेन को युद्ध में हथियारों की पूर्ति भी रूस के विरुद्ध युद्ध माना जाएगा और यदि युद्ध में कोई देश शामिल होता है तो रूस उसे अपने ऊपर हमला ही मानेगा और इसके परिणाम उस शामिल देश को तुरंत भुगतने पड़ेंगे। कुल मिलाकर वैश्विक अशांति का एक खतरनाक माहौल तैयार हो गया है और रूस यूक्रेन के युद्ध की तीव्रता और भयानक परिस्थितियों को देखते हुए विश्व युद्ध की आशंका बलवती हो रही है। व्लादिमीर पुतिन का विस्तार वादी दृष्टिकोण और जेलेंस्की की हठधर्मिता पूरे विश्व को विश्व युद्ध की ओर ले जा रहा है, जो अत्यंत चिंतनीय और अमानवीय परिणाम लाने की दिशा में एक खतरनाक कदम होगा।

Advertisement
Advertisement

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति ATAL HIND उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार #ATALHIND के नहीं हैं, तथा atal hind उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

अटल हिन्द से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।

Related posts

हिंदुओं के लिए न तो ‘परशुराम जयंती’ और न ‘अक्षय तृतीया’ ऐसे पर्व हैं जो पूरे भारत में उस पैमाने पर मनाए जाते हों जैसे दुर्गा पूजा या होली-दीवाली मनाए जाते हैं.

atalhind

बिहार सरकार पटना विश्वविद्यालय को पूरी तरह बंद कर इमारत और ज़मीन बेचकर खा जाए

admin

आपातकाल के स्याह दिन बनाम अच्छे दिन

admin

Leave a Comment

%d bloggers like this:
URL