हरियाणा महिला आयोग का पुनर्गठन: ऊषा प्रियदर्शनी बनीं नई अध्यक्ष, मीना परमार संभालेंगी उपाध्यक्ष का पद
चंडीगढ़ /12 जून 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो
हरियाणा सरकार ने राज्य महिला आयोग का पुनर्गठन करते हुए नई नियुक्तियां कर दी हैं। कुरुक्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ के साथ विवाद के बाद रेनू भाटिया के इस्तीफे से रिक्त हुए अध्यक्ष पद पर गुरुग्राम की ऊषा प्रियदर्शनी को नियुक्त किया गया है। ऊषा प्रियदर्शनी वर्तमान में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव शेखर विद्यार्थी ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। नई नियुक्तियों के अनुसार, तोशाम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकीं भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री मीना परमार को आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, भारती सैनी, सुनीता लोहचब, सुमन शहजादवाला, अनुकंपा गर्ग और सुनीता चौहान को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है।
रेनू भाटिया का इस्तीफा, विवादित बयान के बाद दबाव में लिया फैसला
हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भेज दिया है। उनके इस्तीफे के पीछे कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में एक बच्ची के साथ हुई घटना के बाद दिया गया उनका वह विवादास्पद बयान मुख्य कारण माना जा रहा है, जिस पर प्रदेश भर की नर्सें आंदोलित हो गई थीं।
क्या था पूरा विवाद?
कुरुक्षेत्र के एक सरकारी अस्पताल में एक नाबालिग बच्ची के साथ डॉक्टर द्वारा यौन शोषण का मामला सामने आया था। इस मामले में जांच के लिए पहुंचीं रेनू भाटिया ने वहां मौजूद नर्सों को ही फटकार लगा दी थी। उन्होंने नर्सों से सवाल किया था कि घटना के समय वे वहां क्यों नहीं थीं और उन्होंने बच्ची को डॉक्टर के साथ अकेला क्यों छोड़ा?
इसी दौरान उन्होंने एक विवादास्पद टिप्पणी की— “आपकी बेटी को किसी के साथ कमरे में छोड़ दूं?”—इस बयान के बाद राज्य भर की नर्सिंग फेडरेशन लामबंद हो गई और उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भाटिया को पद से हटाने की मांग की। विरोध इतना बढ़ गया कि प्रदेश भर की नर्सें हड़ताल पर चली गईं।
इस्तीफे के बाद भी ‘माफी’ से इनकार
भले ही रेनू भाटिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उन्होंने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं दिखाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं माफी नहीं मांगूंगी।” अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि वे पद पर रहें या न रहें, लेकिन प्रदेश की महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई सदैव लड़ती रहेंगी।
प्रशासनिक तकनीकी खामियों के बावजूद, अब नई टीम के कार्यभार संभालने के साथ ही आयोग अपनी नियमित गतिविधियों को गति देगा।


