भगवान शिव को समर्पित सर्वाधिक पुण्यदायी माना गया है श्रावण मास- मेहर चंद पुजारी
अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स /29 जुलाई 2026 /नरेंद्र जेठी /नरवाना
प्राचीन शिव मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मेहर चंद ने श्रावण मास की महिमा का बखान करते हुए बताया कि सनातन धर्म में श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित सर्वाधिक पवित्र और पुण्यदायी महीना माना गया है।
इस मास में किए गए जप, तप, व्रत, उपवास, दान, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप तथा शिवपूजन का फल अनेक गुना बढ़कर प्राप्त होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि श्रावण मास में भगवान आशुतोष अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब प्रलयंकारी हलाहल विष प्रकट हुआ, तब समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया और नीलकंठ कहलाए।
उनके कंठ की ज्वाला को शांत करने हेतु देवताओं ने निरंतर जलाभिषेक किया। तभी से श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक तथा गंगाजल से अभिषेक करने की पावन परंपरा चली आ रही है।
***श्रावण मास में श्रद्धालुओं के लिए अपनाने योग्य बातें***
उन्होंने बताया कि प्रतिदिन ओम नम: शिवाय अथवा महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घृत एवं शक्कर से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, शमीपत्र, भस्म एवं मौसमी फल अर्पित करें।
श्रावण के प्रत्येक सोमवार का व्रत रखें एवं शिव आराधना करें। गौसेवा, अन्नदान, वस्त्रदान तथा निर्धनों की सेवा पर ध्यान दें। सत्य, संयम, सदाचार और सात्त्विक जीवन का पालन करते हुए क्रोध, अहंकार, असत्य, नशा तथा हिंसा से दूर रहें।
पं. मेहरचंद ने बताया कि श्रद्धा और भक्ति से भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों के जीवन से अनेक प्रकार के दु:ख, रोग, भय, ग्रह बाधाएं एवं विघ्न दूर होते हैं। साथ ही, उन्हें आरोग्य, सुख, शांति, समृद्धि, यश, दीर्घायु और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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