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पटौदी अस्पताल का मामला 15 सितंबर को ट्रांसफर और 27 को हुए रिलीव एसएमओ डॉ योगेंद्र

पटौदी अस्पताल का मामला
15 सितंबर को ट्रांसफर और 27 को हुए रिलीव एसएमओ डॉ योगेंद्र
डॉक्टर योगेंद्र को विदाई पर अस्पताल के स्टाफ ने पहनाई तिरंगी टोपी
डॉ योगेंद्र के कार्यकाल के दौरान विवाद सितंबर माह में चरम पहुंचे
पटौदी नागरिक अस्पताल में 24 जनवरी को संभाली थी जिम्मेदारी
2 को हड़ताल 3 को ऑपरेशन थिएटर में हंगामा रोकने में रहे नाकाम
पैरामेडिकल-आउटसोर्स स्टाफं ने ट्रांसफर रुकवाने के लिए दिया धरना
पटौदी अस्पताल का मामला  15 सितंबर को ट्रांसफर और 27 को हुए रिलीव एसएमओ डॉ योगेंद्र
पटौदी अस्पताल का मामला 15 सितंबर को ट्रांसफर और 27 को हुए रिलीव एसएमओ डॉ योगेंद्र
atalhind.com/फतह सिंह उजाला
पटौदी । पटौदी मंडी नगर परिषद के पटौदी नागरिक अस्पताल में बतौर एसएमओ डॉक्टर योगेंद्र सिंह का कार्यकाल विवादों के चलते लंबे समय तक चर्चा बना रहेगा। हालांकि डॉक्टर योगेंद्र के ट्रांसफर आर्डर 15 सितंबर को ही सीएचसी तावडू के लिए हो चुके थे , लेकिन उन्होंने पटौदी नागरिक अस्पताल का चार्ज 1 दिन पहले 27 सितंबर को छोड़ा और यहां से रिलीव हुए। विदाई के समय निवर्तमान एसएमओ डॉक्टर योगेंद्र सिंह को अस्पताल के ही कर्मचारियों के द्वारा तिरंगी टोपी पहना कर उन्हें विदा किया गया ।
पटौदी नागरिक अस्पताल में बतौर एसएमओ डॉक्टर योगेंद्र सिंह के द्वारा प्रमोशन पर 24 जनवरी 2022 को कार्यभार संभाला गया था । इस दौरान कथित रूप से अस्पताल के हालात धीरे धीरे असामान्य होते चले गए , कुछ मामले और घटनाएं ऐसी हुई जो कि नहीं होनी चाहिए थी । यह बात कहने में कतई भी संकोच नहीं है कि निवर्तमान एसएमओ डॉक्टर योगेंद्र के कार्यकाल के दौरान पटौदी नागरिक अस्पताल में कर्मचारियों के बीच खासतौर से पैरामेडिकल और आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर जबरदस्त तरीके से लामबंदी और खेमा बंदी चरम पर पहुंच गई । इसके बाद जो कुछ भी घटनाक्रम घटित हुए , वह जिला चिकित्सा अधिकारी से लेकर चंडीगढ़-पंचकूला तक चिकित्सा अधिकारियों के लिए भी एक रहस्यमई अबूझ पहेली से कम साबित नहीं हो सकेंगे ?
क्योंकि जुलाई के महीने से लेकर पटोदी नागरिक अस्पताल का चार्ज छोड़ने के दौरान तक कई मामलों की जांच हाई लेवल कमेटी के द्वारा जारी है । ऐसे में इस बात को लेकर भी जिज्ञासा बनी हुई है कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो फिर आने वाले समय में स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी, हरियाणा सरकार और सरकार के स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा क्या कुछ एक्शन लिया जा सकेगा ?
सितंबर माह के दौरान 2 सितंबर को अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के पैरामेडिकल स्टाफ और आउटसोर्स कर्मचारियों के द्वारा निवर्तमान एसएमओ डॉक्टर योगेंद्र सिंह का ट्रांसफर रोकने का सरकार और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों सहित स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज पर भी दबाव बनाने के लिए हड़ताल कर दी गई । यह हड़ताल भी इस वजह से सुर्खियां बन गई क्योंकि अस्पताल की बिजली आपूर्ति रहस्य में तरीके से बंद हो गई। जिसके कारण दोपहर तक सैकड़ों मरीज अपने ओपीडी कार्ड बनवाने से वंचित रहने के साथ ही संबंधित डॉक्टरों को दिखाने और उपचार करवाने से भी वंचित रह गए।
पटौदी अस्पताल का मामला
पटौदी अस्पताल का मामला
इस घटनाक्रम की जानकारी भी कथित रूप से जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ वीरेंद्र यादव से भी छुपाई जाने की चर्चा बनी रही । 2 सितंबर को दोपहर लगभग 12 बजे पटौदी के एसडीएम जब मौके पर पहुंचे , हड़ताल पर बैठे डॉक्टर योगेंद्र समर्थकों के द्वारा एक मांग पत्र भी सौंपा गया । इससे पहले पटौदी भाजपा मंडल अध्यक्ष कृष्ण यादव माजरा पटौदी के एमएलए एडवोकेट जरावता के निर्देश पर अस्पताल के घटनाक्रम की जानकारी लेने के लिए पहुंचे । यहां पहुंच कर उन्होंने सारे हालात का जायजा लेने के बाद सबसे पहले बिजली आपूर्ति को बहाल करवाया ।
सूत्रों के मुताबिक डॉक्टर योगेंद्र सिंह के द्वारा कथित रूप से अपना ट्रांसफर रुकवाने के लिए भरसक प्रयास किए गए । लेकिन जो उनके ऊपर आरोप लगे, वह बेहद ही गंभीर आरोप माने जा रहे हैं । इसके अलावा 2 सितंबर की हड़ताल और 3 सितंबर को सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान ऑपरेशन थिएटर में पैरामेडिकल स्टाफ सहित आउटसोर्स कर्मचारियों के द्वारा काटा गया बवाल भी निवर्तमान एसएमओ डॉक्टर योगेंद्र सिंह के लिए जी का जंजाल ही साबित हुआ। 2 और 3 सितंबर के पटौदी नागरिक अस्पताल में पूरे घटनाक्रम सहित खासतौर से 3 सितंबर को ऑपरेशन थिएटर में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान काटे गए बवाल को प्रमुखता के साथ में शासन -प्रशासन ,हरियाणा सरकार , स्वास्थ्य मंत्री के ध्यानाकर्षण के लिए प्रमुखता से उठा प्रकाशित भी किया गया । इसके बाद 5 सितंबर को सीएमओ गुरुग्राम डॉ वीरेंद्र सिंह अचानक पटौदी नागरिक अस्पताल पहुंचे ,तो उन्होंने भी उस समय काफी कर्मचारियों को ड्यूटी के समय से विलंब आना पाया था। इस पर उन्होंने मौखिक तौर पर सभी कर्मचारियों को चेतावनी दी , कर्मचारी समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुंचे । सीएमओ डॉ वीरेंद्र सिंह यादव के आगमन की सूचना पर जब मीडिया कर्मी अस्पताल परिसर में पहुंचे तो बातचीत के दौरान मौखिक तौर पर उनके द्वारा इतना ही कहा गया कि डॉक्टर योगेंद्र सिंह छुट्टी पर हैं और उनके द्वारा डॉक्टर सरदार गुरिंदर को कार्यवाहक एसएमओ की जिम्मेदारी सौंपने की बात कही गई।
डॉक्टर योगेंद्र का तबादला सीएचसी तावडू
पटौदी नागरिक अस्पताल के निवर्तमान एसएमओ डॉक्टर योगेंद्र सिंह का तबादला सीएचसी तावडू के लिए किए जाने के आर्डर 15 सितंबर को ही हो चुके थे। लेकिन अपरिहार्य कारणों से उन्होंने पटौदी अस्पताल का चार्ज नहीं छोड़ा । इस बीच कार्यवाहक एसएमओ की जिम्मेदारी डॉक्टर सरदार गुरिंदर के द्वारा ही संभाली गई। अंततः 27 सितंबर को डॉक्टर योगेंद्र सिंह पटौदी नागरिक अस्पताल पहुंचे और यहां पर सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिलीव हो गए। डॉक्टर योगेंद्र सिंह को विदाई देने के लिए पटौदी नागरिक अस्पताल के ही कुछ कर्मचारियों के द्वारा तिरंगी टोपी पहना कर यादगार तोहफा भेंट किया गया ।
13 को आदेश डॉ नीरू पटौदी की एसएमओ
इसी घटनाक्रम में सीएचसी फर्रूखनगर में कार्यरत डॉ नीरू यादव को पटोदी नागरिक अस्पताल का एसएमओ नियुक्त कर उनके फरुखनगर से ट्रांसफर के ऑर्डर जारी कर दिए गए । यहां हैरानी की बात यह है कि निवर्तमान एसएमओ डॉक्टर योगेंद्र सिंह के ट्रांसफर आर्डर 15 सितंबर को जारी किए गए , सबसे अधिक विचारनीय और चिंतन का प्रसंग यही है कि डॉक्टर योगेंद्र के ट्रांसफर आर्डर 15 सितंबर को जारी हुए जबकि 13 सितंबर को डॉक्टर नीरू यादव के लिए आर्डर जारी किए गए कि पटौदी नागरिक अस्पताल के एस एम ओ का कार्यभार संभाले । ऐसे में संभवत कुछ तकनीकी कारण रहे होंगे ? जो इस प्रकार के आदेश उच्च स्तर पर जारी कर दिए गए।
जवाबदेही और जिम्मेदारी तो बनती है
निवर्तमान एसएमओ डॉ योगेंद्र सिंह के करीब 9 महीने के कार्यकाल के दौरान जुलाई महीने से लेकर सितंबर के महीने तक जो कुछ भी घटनाक्रम पटौदी सामान्य नागरिक अस्पताल में घटे । उन सभी मुद्दे और मामलों को लेकर उनकी जवाबदेही जांच पूरी होने तक बनी ही रहेगी । 2 सितंबर को साढ़े 4 घंटे तक हड़ताल किए जाने के दौरान एक बार भी उनके द्वारा हड़ताली कर्मचारियों को हड़ताल खत्म करने का न तो अनुरोध किया गया नहीं निर्देश दिए गए । कथित रूप से हड़ताली कर्मचारी अपनी अपनी हाजिरी लगाकर और पूरी तरह से अस्पताल का कामकाज ठप कर मरीजों को उनके रहमों करम पर छोड़ हड़ताल पर जमकर बैठे रहे । इसके अगले दिन 3 सितंबर को सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान ऑपरेशन थिएटर में जो कुछ भी बवाल काटा गया , उसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही भी निवर्तमान एसएमओ योगेंद्र सिंह की की जांच पूरी होने तक बनी रहेगी । आखिर ऐसे क्या कारण रहे जो पैरामेडिकल स्टाफ और आउट सोर्स कर्मचारी पटौदी नागरिक अस्पताल की सेकंड फ्लोर पर ऑपरेशन थिएटर परिसर तक पहुंच कर जबरदस्ती ऑपरेशन थिएटर में भी घुस गए? इस पूरे घटनाक्रम पर निवर्तमान एचएमओ डॉक्टर योगेंद्र सिंह के द्वारा अपने ही विभाग के उच्च अधिकारियों को क्या बताया गया या फिर किस प्रकार की और क्या रिपोर्ट दी गई ? यह भी रहस्य बना हुआ है । यदि इस पूरे घटनाक्रम की सही प्रकार से जांच हो तो , इस बात से इंकार नहीं की दोषियों के खिलाफ हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री और गृह मंत्री अनिल विज सहित हरियाणा सरकार कठोर से कठोर कार्यवाही करने में कतई भी राहत नहीं बरतेगी।
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