तंबाकू सेवन से अस्थमा, निमोनिया, तपेदिक, फेफड़े का कैंसर,हृदय एवं पक्षाघात की बीमारी बढ़ रही है-चन्द्रकान्त आर्य
युवा वर्ग में धूम्रपान का शौक दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है-चन्द्रकान्त आर्य
नरवाना 31 मई (नरेन्द्र जेठी)
तंबाकू सेवन करने से अस्थमा, निमोनिया, तपेदिक, फेफड़े का कैंसर ,हृदय एवं पक्षाघात की बीमारी बढ़ रही है। युवा वर्ग में धूम्रपान का शौक दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। आर्य समाज नरवाना संबंद्धता आर्य प्रतिनिधि सभा हरयाणा दयानन्द मठ रोहतक ने प्रधान चंद्रकांत आर्य के मार्गदर्शन में जेष्ठ पूर्णिमा व अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस पर आर्य समाज एवं राजकीय महाविद्यालय नरवाना में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए आज यह बात प्रधान चन्द्रकान्त आर्य ने कही ।
अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध के उपलक्ष में युवा एवं आम जनमानस को तंबाकू एवं अन्य धूम्रपान से परहेज करने का आह्वान करते हुए उन्होने कहा कि तम्बाकू के धुम्रपान में निकोटीन,टार एवं अन्य रसायनों के कारण रक्त गाढ़ा होने से फेफड़ों में ऑक्सीजन के आदान-प्रदान करने वाली कोशिकाएं रोग ग्रस्त होने से अनेकों युवा उच्च रक्तचाप, हृदय, पक्षाघात, कैंसर जैसी घातक बीमारियों से ग्रस्त हो चुके हैं।
तंबाकू के साथ सभी प्रकार के नशों को त्यागने का आह्वान किया गया। भारत की जनसांख्यिकी दिन प्रतिदिन बदल रही है।
प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि जेष्ठ पूर्णिमा के उपलक्ष में उपवास रखने से शरीर में अग्नि तत्व की प्रसन्नता को जल तत्व के माध्यम से नियंत्रित करने का विधान है।
उत्तम स्वास्थ्य के लिए जल और अग्नि तत्व को नियंत्रित करने के लिए पृथ्वी तत्व के अंतर्गत पीले एवं मीठे फलों के सेवन करने का आह्वान किया। अहिल्याबाई होलकर के जीवन के उपलक्ष में बताया कि भारत वीर वीरांगनाओं की जन्म एवं कर्मभूमि रही है।
पति ,पुत्र, पुत्रवधू और दो पुत्रियों के अकस्मात निधन के बाद सन्यास में रहकर साहस और विवेक से निर्णय लें राजव्यवस्थाओं निर्बाध रूप संचालित किया।अहिल्याबाई होलकर ने भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करते हुए अनेकों मंदिरों, देवालयों और गुरुकुलों का उद्धार किया।
अहिल्याबाई होल्कर नारी के रूप में स्वावलंबी, स्वाभिमानी, संयमी, सहनशील, करुणामयी आदरणीय एवं सम्मान का प्रतीक है। भारतीय राजाओं को अंग्रेजों के विरुद्ध सतर्कता सजाता में रहते हुए संगठित किया। इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी समाजसेवी प्रो0 जयपाल आर्य ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता की आड़ प्रलोभन देकर मतांतरण करवाया जा रहा है।
मत्तांत्रिकों को देश की मूल संस्कृति परंपराओं के विरुद्ध विषवमन के लिए प्रेरित किया जाता है।गाजियाबाद के घोड़ा बस्ती में हुए नृशंस हत्याकांड में दिनदहाड़े युवा की बलि देकर के जश्न मनाना मानवता के लिए कलंक है।
सभ्य समाज में छल- बल, कपट, धोखे से निर्दोष निरही प्राणियों मानव हत्या करना कलंक है। चरित्रवान गुणवान, विद्वान, शीलवान, बलवान, साहसिक, ब्रह्मचारी, सदाचारी,विवेकशील प्रज्ञावान मनुष्य ही राष्ट्र के महानायक होते है। कार्यक्रम में भजन एवं गीतों के माध्यम से धर्मपाल आर्य ने सन्ध्या में ईश्वर स्तुति, प्रार्थना और उपासना का उल्लेख किया।
मथिलेश शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के पास विद्या, बल और धन तीनों का होना अनिवार्य है। विद्या से विद्वान बाल से बलवान और धन से धनवान बनता है। तीनों शक्तियों दुरुपयोग महाविनाश और तीनों का सन्तुलित व्यावहारिक कल्याणकारी प्रयोग समाज हित में अपेक्षित है।
पर्यावरण संवर्धन के लिए हवन यज्ञ भी किया गया, इस अवसर पर वेदपाल आर्य, प्राचार्या मीना गर्ग, बलबीर सिंह,कर्ण, न्यायदरी, स्नेह लता, परमजीत, विक्रम जीत एवं यशपाल आर्य इत्यादि आर्य गण उपस्थित रहे।


