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भाजपा हरियाणा में किसी भी “सूरत” में तीसरी बार सत्ता में “वापसी” नहीं कर पाएगी ,फायदा उठा रही अफसरशाही

भाजपा हरियाणा में किसी भी “सूरत” में तीसरी बार सत्ता में “वापसी” नहीं कर पाएगी ,फायदा उठा रही अफसरशाही

खाली चेयरमैनियों का क्या अचार डालेगी भाजपा??नेताओं को एडजस्ट नहीं करके भाजपा कर रही सियासी सुसाइड
तीन दर्जन बोर्डो और कारपोरेशनों के खाली चेयरमैन के पदों का भरपूर फायदा उठा रही अफसरशाही


—-राजकुमार अग्रवाल —–

चंडीगढ़। हरियाणा की सत्ता पर साढ़े 7 साल से काबिज भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी “मूर्खता” कर रही है जिसे सियासी “सुसाइड” ही कहा जाएगा।
हरियाणा की सत्ता पर लगातार दो बार से शासन कर रही भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी बहुत बड़ी “गलती” कर रही है जो उसे आगे जाकर बहुत “महंगी” पड़ेगी।
जी हां, हम बात कर रहे हैं खाली पड़ी चेयरमैनियों की। हरियाणा में 4 दर्जन से अधिक बोर्ड और कॉरपोरेशन है। इनमें से डेढ़ दर्जन बोर्डो और कोरपोरेशनों में चेयरमैन की नियुक्तियां हुई हैं। बाकी 3 दर्जन से अधिक बोर्ड और कॉरपोरेशनों में लंबे समय से चेयरमैन नहीं है।
अगर भाजपा के रणनीतिकार मूर्खता को छोड़कर इन चेयरमैनियों में अपने नेताओं को एडजेस्ट कर दें तो मार्केट कमेटियों के कई दर्जन खाली पदों के अलावा यह तीन दर्जन बोर्ड और कॉरपोरेशन भाजपा की सत्ता को “मजबूती” देने का काम कर सकती हैं।

जी हां यह सच्चाई है कि मार्केट कमेटियों, बोर्डों और कॉरपोरेशनों के चेयरमैन के पद नहीं भरे जाने के कारण जहां एक तरफ भाजपा के नेताओं की एडजस्टमेंट नहीं हो पाई है, वहीं दूसरी तरफ अफसरशाही भरपूर “मौज” ले रही है।
तीन दर्जन बोर्डों और कॉरपोरेशनों में अगर भाजपा अपने नेताओं को एडजस्ट करती तो यह नेता पूरे जज्बे और जज्बात के साथ भाजपा की “मजबूती” के लिए काम करते लेकिन साढ़े 7 साल से ज्यादा समय की सत्ता होने के बावजूद भाजपा के रणनीतिकार और हाईकमान इन बोर्डों और कॉरपोरेशनों की चेयरमैन पद को भरने के प्रति “संजीदा” नहीं है जिसका पार्टी को “भारी” नुकसान हो रहा है।
नेताओं की अडजस्टमेंट नहीं होने के कारण दूसरी पंक्ति के नेता अपनी ही सरकार के जन हितेषी फैसलों को लेकर जनता में पॉजिटिव चर्चा नहीं करते हैं।
अगर तीन दर्जन बोर्डों और कॉरपोरेशन और कई दर्जन मार्केट कमेटी की चेयरमैनी पर बीजेपी और जेजेपी के नेताओं की एडजस्टमेंट कर दी जाती तो दोनों ही पार्टियों को बड़ा फायदा होता।
चेयरमैन बनाए गए नेता जिम्मेदारी मिलने के बाद जहां पार्टी की मजबूती के लिए काम करते वहीं जनता में भी सरकार के फैसलों की तारीफ करते जिससे पार्टी और सरकार दोनों ही मजबूत होती।
लेकिन ऐसा करने की बजाय भाजपा में नेताओं की “बेकद्री” और “अनदेखी” की जा रही है।
बात यह है कि भाजपा अगर स्थानीय निकाय चुनाव में बढ़िया प्रदर्शन करना चाहती है तो उसे मार्केट कमेटियों, बोर्डों व कारपोरेशनों के चेयरमैनी के पदों को अविलंब भरना चाहिए।
खाली पड़े पदों का न तो सरकार को फायदा है और न ही पार्टी को फायदा है बल्कि सिर्फ और सिर्फ अफसरशाही ही इनकी मौज ले रही है।
इन पदों पर अगर भाजपा अपने नेताओं को एडजस्ट करने का काम करेगी तो आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव में उसे इसका “बंपर” फायदा होगा क्योंकि चेयरमैन बनाए गए नेता अपने-अपने शहरों और कस्बों में पार्टी की जीत के लिए भरपूर पसीना बहाते हुए नजर आएंगे।
अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह नेता चुनाव में ड्यूटी निभाने की सिर्फ “फॉर्मेलिटी” अदा करेंगे जिसके कारण भाजपा की जीत पर कई शहरों में सवालिया निशान रहेंगे।


भाजपा हाईकमान और मुख्यमंत्री खट्टर को इस बात का संज्ञान लेकर पार्टी के नेताओं को शीघ्र से शीघ्र बोर्डो, कारपोरेशनों व मार्केट कमेटी में चेयरमैनी पर आसीन करना चाहिए ताकि पार्टी के संगठन और नेताओं दोनों को ही मजबूती मिल सके।
अगर ऐसा नहीं किया गया तो भाजपा किसी भी “सूरत” में तीसरी बार सत्ता में “वापसी” नहीं कर पाएगी क्योंकि जब तक पार्टी के नेता पूरे “जुनून” के साथ फील्ड में हो कर काम नहीं करेंगे तब तक पार्टी का ने तो वोट बैंक बढ़ेगा और ना ही जनता के बीच सरकार के अच्छे कामों का प्रचार होगा।
अब देखना है कि भाजपा सरकार के रणनीतिकार अपनी इस बड़ी गलती को “सुधारने” का काम करते हैं या गलत रास्ते पर चलते हुए पार्टी का “बंटाधार” करते हैं।

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