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भूपेंद्र हुड्डा ने किया दलितों, ब्राह्मणों, बनियों और गुर्जरो का अपमान,बेटे को बना दिया जबरदस्ती हीरो

भूपेंद्र हुड्डा ने किया दलितों, ब्राह्मणों, बनियों और गुर्जरो का अपमान,बेटे को बना दिया जबरदस्ती हीरो
गैर जाट नेताओं को कर दिया सरेआम जीरो
उदयभान पीछे भूपेंद्र हुड्डा के साथ खड़े होकर हाथ जोड़ने को “मजबूर” थे।
जितेंद्र भारद्वाज ब्राह्मण समुदाय के प्रतीक के तौर पर कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं उन्हें भूपेंद्र हुड्डा ने अपने अपने बेटे के साथ खड़ा होने के “लायक” भी नहीं समझा।

चंडीगढ़(Atal Hind)अब यह बात पूरी तरह से साबित हो चुकी है कि भूपेंद्र हुड्डा अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाने के लिए “धृतराष्ट्र” की तरह “अंधे” हो चुके हैं और उन्हें “पुत्रमोह” में कुछ भी ठीक- गलत नजर नहीं आ रहा है।
भूपेंद्र हुड्डा ने कल हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष उदय भान और कार्यकारी अध्यक्षों सुरेश गुप्ता, श्रुति चौधरी, रामकिशन गुर्जर और जितेंद्र भारद्वाज के पद ग्रहण समारोह में अहंकार की “मर्यादाओं” को तार-तार कर दिया।
भूपेंद्र हुड्डा ने कल सरेआम दलितों, ब्राह्मणों, बनियों और गुर्जरों का अपमान कर दिया
उदय भान का निकाल दिया जुलूस कल का रोड शो उदयभान और दूसरे कार्यकारी अध्यक्षों के पद ग्रहण के उपलक्ष्य में निकाला गया था।
इस लिहाज से रोड शो के स्टार चेहरे उदयभान होने चाहिए थे लेकिन भूपेंद्र हुड्डा ने उदय भान की बजाए अपने सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा को रोड शो का मुख्य स्टार बना दिया।दीपेंद्र हुड्डा तो गाड़ी में अकेले आगे खड़े होकर “अपनी” लोकप्रियता का माहौल बना रहे थे वहीं दूसरी तरफ “बेबसी” में उदयभान पीछे भूपेंद्र हुड्डा के साथ खड़े होकर हाथ जोड़ने को “मजबूर” थे।
अगर दलित नेता उदयभान की जगह कोई दूसरा प्रदेश अध्यक्ष होता तो भूपेंद्र हुड्डा इस तरह से उसकी बेज्जती करने का काम नहीं कर सकते थे।भूपेंद्र हुड्डा ने उदय भान को दीपेंद्र हुड्डा से पीछे खड़ा करके न केवल अध्यक्ष पद की गरिमा का “अपमान” किया बल्कि इसके साथ साथ दलित समुदाय की भावनाओं को भी “कुचलने” का काम किया।
जब रोड शो उदयभान के नाम का घोषित किया गया था तो गाड़ी में सबसे आगे उदयभान को ही खड़ा किया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा करने की बजाय भूपेंद्र हुड्डा ने बेटे दीपेंद्र हुड्डा का “महिमामंडन” करने का काम किया और दलित नेता उदय भान पर “रबड़ स्टैंप” का ठप्पा लगा दिया।
जितेंद्र भारद्वाज की इज्जत हुई तार- तार
प्रियंका गांधी के आदेश पर कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए जितेंद्र भारद्वाज को भूपेंद्र हुड्डा परिवार ने अपमानित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। जितेंद्र भारद्वाज को ब्राह्मण समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।
भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने दिल्ली में तो जितेंद्र भारद्वाज को अपनी गाड़ी में तो बैठा दिया लेकिन हरियाणा में एंट्री करने के बाद उन्हें जनता का अभिवादन करने की “इजाजत” नहीं दी गई।उल्टा गन्नौर के बाद भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने जितेंद्र भारद्वाज को अपनी गाड़ी से भी नीचे उतार दिया।
चार कार्यकारी अध्यक्षों में से सिर्फ जितेंद्र भारद्वाज ही रोड शो में शामिल थे लेकिन उनको सम्मान देने की बजाय भूपेंद्र हुड्डा ने उनको अपनी गाड़ी से नीचे उतार दिया।जो जितेंद्र भारद्वाज ब्राह्मण समुदाय के प्रतीक के तौर पर कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं उन्हें भूपेंद्र हुड्डा ने अपने अपने बेटे के साथ खड़ा होने के “लायक” भी नहीं समझा।
जितेंद्र भारद्वाज की बेइज्जती का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। चंडीगढ़ में पद ग्रहण समारोह के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए भूपेंद्र हुड्डा ने जितेंद्र भारद्वाज को कार्यकारी अध्यक्ष होने के बावजूद 1 मिनट भी बोलने का समय नहीं दिया।
सिर्फ उदय भान की मीडिया से बातचीत करवा कर भूपेंद्र हुड्डा ने जितेंद्र भारद्वाज को यह दिखा दिया कि कार्यकारी अध्यक्ष होने के बावजूद उनकी कोई हैसियत नहीं है।
बनिया समुदाय को पहुंचाई ठेस
बीजेपी के साथ जा चुके वैश्य वोटरों का फिर से कांग्रेस के साथ जोड़ने के लिए सुरेश गुप्ता को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है लेकिन भूपेंद्र हुड्डा ने कल यह बता दिया कि उन्हें न तो सुरेश गुप्ता की जरूरत है और ना ही वैश्य वोटों की जरूरत है।
कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए सुरेश गुप्ता का पद ग्रहण करने के बावजूद मीडिया से 2 मिनट बातचीत करने की भी इजाजत नहीं दी गई। भूपेंद्र हुड्डा ने तानाशाही का परिचय देते हुए सुरेश गुप्ता को नहीं बुलवाकर पूरे वैश्य समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम किया

गुर्जरों के रसूख को मारी गई चोट
भाजपा की बड़ी आंधी के बावजूद अपनी पत्नी शैली गुर्जर को नारायणगढ़ से विधायक बनाने वाले रामकिशन गुर्जर को बीसी वोटरों के प्रतिनिधि के तौर पर कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।रामकिशन गुर्जर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के नजदीकी माने जाते हैं।
पद ग्रहण समारोह में भूपेंद्र हुड्डा ने रामकिशन गुर्जर को भी मीडिया के साथ 2 मिनट बात सांझा करने का अवसर नहीं दिया। उन्होंने रामकिशन गुर्जर को ही अनदेखा नहीं किया बल्कि पूरे बीसी समाज को ही यह बता दिया कि कांग्रेस पार्टी में सिर्फ उन्हीं की चलेगी और दूसरे किसी नेता का वजूद नहीं है।
बात यह है कि भूपेंद्र हुड्डा ने कल शक्ति प्रदर्शन के दौरान यह साफ कर दिया कि अब कांग्रेस में सिर्फ उनके और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा का ही आदेश चलेगा।उन्होंने यह सरेआम बता दिया कि दलित नेता उदयभान को सिर्फ रबड़ स्टैंप के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए अध्यक्ष बनाया गया है ना कि दलित समुदाय को पार्टी में सबसे बड़ी भागीदारी देने के लिए।

भूपेंद्र हुड्डा ने कभी यह भी साफ कर दिया कि श्रुति चौधरी, सुरेश गुप्ता, रामकिशन गुर्जर और जितेंद्र भारद्वाज को भी सिर्फ औपचारिकता के लिए कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इन नेताओं को सम्मान नहीं देकर भूपेंद्र हुड्डा ने यह बता दिया कि उन्हें दलितों, ब्राह्मणों, बनियों और गुर्जर समुदायों की कोई “जरूरत” नहीं है इसलिए उन्होंने इन चार बड़े समुदायों के प्रतिनिधियों को 2 मिनट मीडिया से बातचीत करने का भी समय देना जरूरी नहीं समझा।
भूपेंद्र हुड्डा को सिर्फ अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा की ताजपोशी नजर आ रही है। उन्होंने हरियाणा प्रदेश कांग्रेस पर कुंडली मार ली है और जिस तरह से मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बाकी सारे नेताओं को खुड्ढे लाइन लगा लिया था, इसी तरह पार्टी का संगठन कब्जे में लेकर हुए अब बाकी सारे नेताओं को हाशिए पर डालने का काम करेंगे।
कांग्रेस पार्टी अब पूरी तरह से भूपेंद्र हुड्डा के चंगुल में आ गई है जहां दलित प्रदेशाध्यक्ष उदय भान और गैर जाट नेताओं सुरेश गुप्ता, रामकिशन गुर्जर और जितेंद्र भारद्वाज को कार्यकारी अध्यक्ष होने के बावजूद अपनी बात रखने की आजादी नहीं होगी। जब अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्षों की यह हालत है तो बाकी नेताओं और समुदायों की कितनी सुनवाई होगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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