हरियाणा में बड़ी राजनीतिक नियुक्तियां: बोर्ड-निगमों में कार्यकर्ताओं और पूर्व उम्मीदवारों को मिली जिम्मेदारी, संगठन संतुलन पर फोकस
चंडीगढ़ /31 मई /अटल हिन्द /योगेश गर्ग
हरियाणा सरकार ने बोर्डों और निगमों में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां कर चुनाव में टिकट से वंचित रहे नेताओं, चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों और लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को सत्ता में भागीदारी दी है।
जुलाना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट के खिलाफ चुनाव लड़ चुके कैप्टन योगेश बैरागी को हरियाणा समाज कल्याण बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके एडवोकेट वेदपाल को हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया है। यह बोर्ड प्रदेश की मंडियों के रखरखाव, संचालन और ग्रामीण सड़कों के विकास में अहम भूमिका निभाता है। राज्य सरकार द्वारा जीरो बजट कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित नई मंडियों के संचालन में भी बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
रोहतास जांगड़ा को श्रम कल्याण बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। हाल के वर्षों में फर्जी स्लिप घोटाले को लेकर चर्चा में रहे इस बोर्ड का महत्व गिग वर्कर्स के पंजीकरण संबंधी नई पहल के बाद और बढ़ गया है।
इसके अलावा राजपाल बैनीवाल को हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण का सदस्य बनाया गया है, जबकि गुरनाम सैनी को हरियाणा भूमि सुधार एवं विकास निगम लिमिटेड का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
नायब सरकार की इन नियुक्तियों में महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। सुनीता दांगी को हरियाणा महिला विकास निगम की चेयरपर्सन बनाया गया है।
वहीं सुभाष कलसाना को हरियाणा राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक की प्रबंधन समिति में सरकार का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है।
भारत भूषण जुयाल को पहले हरियाणा स्टेट को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक लिमिटेड की प्रबंध समिति में सरकारी नामित सदस्य बनाया गया और बाद में उन्हें तत्काल प्रभाव से हरको बैंक का नया चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया।
इन नियुक्तियों को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार द्वारा संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियों में भागीदारी देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।हरियाणा सरकार द्वारा बोर्डों, निगमों और विभिन्न संस्थाओं में की गई ताजा नियुक्तियों को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इन नियुक्तियों के जरिए संगठन के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जो लंबे समय से सरकार में प्रतिनिधित्व की उम्मीद लगाए हुए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नायब सरकार के गठन के बाद यह पहली बड़ी नियुक्ति प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से भाजपा नेतृत्व ने संगठनात्मक संतुलन साधने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया है। यह कदम भविष्य के चुनावी समीकरणों और संगठनात्मक मजबूती की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महत्वपूर्ण नियुक्तियों में रोहतास जांगड़ा को हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया है। वहीं वरिष्ठ भाजपा नेता एडवोकेट वेदपाल को हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड की कमान सौंपी गई है। यह बोर्ड प्रदेश की मंडियों के संचालन, ग्रामीण संपर्क सड़कों के निर्माण और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्र में भी सरकार ने राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है। राजपाल बैनीवाल को हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण में सदस्य नियुक्त किया गया है, जबकि गुरनाम सैनी को हरियाणा भूमि सुधार एवं विकास निगम का चेयरमैन बनाया गया है।
सहकारिता क्षेत्र में सुभाष कलसाना को राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक की प्रबंध समिति में सरकार का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। वहीं भारत भूषण जुयाल को हरको बैंक का चेयरमैन बनाकर सरकार ने सहकारी तंत्र में अपनी सक्रियता का संकेत दिया है।
महिला नेतृत्व को भी इन नियुक्तियों में विशेष महत्व दिया गया है। सुनीता दांगी को हरियाणा महिला विकास निगम की चेयरपर्सन नियुक्त कर सरकार ने महिलाओं की भागीदारी को संस्थागत नेतृत्व तक विस्तार देने का संदेश दिया है।
चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे नेताओं को भी जिम्मेदारियां मिली हैं। जुलाना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके कैप्टन योगेश बैरागी को हरियाणा राज्य सोशल वेलफेयर बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया है। इसे चुनावी मैदान में पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार ने सांस्कृतिक क्षेत्र को भी नजरअंदाज नहीं किया है। लोक गायक बिंदर दनोदा, महेश जोशी, अमित सैनी और गगन हरियाणवी को कला परिषद से जुड़ी जिम्मेदारियां देकर सांस्कृतिक क्षेत्र के प्रभावशाली वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह नियुक्ति प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है। कई बोर्डों, निगमों और आयोगों में महत्वपूर्ण पद अभी भी रिक्त हैं, ऐसे में आने वाले समय में नियुक्तियों का दूसरा चरण भी देखने को मिल सकता है।


