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कैथल नगर निगम चुनाव बीजेपी ने किये एक तीर से दो शिकार कर खेला सुरेश नोच के साथ बड़ा खेल , प्र-ताप को भी चापलूसों से बाहर निकल जीरों ग्राउंड पर आना होगा

कैथल नगर निगम  चुनाव में  बीजेपी हार रही है,विकास  कहीं  गुम  है पिछले कई वर्षो से ,जीतेगा  प्र-ताप भी नहीं

कैथल नगर परिषद का  चुनावी खेला  ‘नारी’, जानें- कौन किस पर भारी

कैथल नगर निगम  चुनाव बीजेपी ने किये एक तीर से दो शिकार कर खेला सुरेश नोच के साथ बड़ा खेल  ,  प्र-ताप को भी चापलूसों से बाहर निकल जीरों ग्राउंड पर आना होगा

कैथल (अटल हिन्द /राजकुमार अग्रवाल )Haryana Elections: कैथल बीजेपी का इतिहास के बारे में बात करें तो इस पार्टी के सभी पुराने और इज्ज्ज़तदार  कार्यकर्ता और नेता बहुत सालों से खुद से अलग किये अपने घर बैठे है या यूँ कह लीजिये की बीजेपी हाईकमान ने उनको बेकदर करके पार्टी से बाहर किया हुआ है

इसलिए वर्तमान हालत में बेशक कैथल विधानसभा सीट पर बीजेपी का विधायक है और जिस तरह  स्थानीय सरकार को लेकर नए समीकरण बन रहे है और बीजेपी का कार्यकर्ताओं के प्रति या आम जनता के प्रति जो रवैया रहा है वह पार्टी को हराने के लिए काफी है

किसी को ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी कैथल मेयर पद पर से बीजेपी प्रत्याक्षी को हराने के लिए क्योंकि बीजेपी नेता और उसके कार्यकर्ता खुद इस काबिल है।


यही नहीं विधायक भी नहीं चाहेगा की कैथल  मेयर सीट बीजेपी जीते ,अंदर खाते पार्टी से खफा परिवार जिसकी पहले विधायकी टिकट कटी ,अब झुनझुना  बजाने के लिए हाथ में थमा दिया ,वो भी पार्टी के इस खेल को समझ नहीं पाए और झुनझुना मिलते ही उछल-कूद शुरू कर दी ,

साहब एक बार मेयर की टिकट  का झुनझुना किसी और कैथल  बीजेपी लीडर को देने बारे जूठा ही सही पार्टी कमान को बोल कर तो देखते ,,तब आता मजा ,जब कोई बस्ता पकड़ने वाला (रवि भूषण गर्ग ) की तरह कोई और सांमने नहीं आता ,,,जो अब खुड्डे लाइन लगा हुआ है।

बेचारे को कोई पूछता तक भी की कोई रवि भूषण गर्ग भी है कैथल में।

यही हालत पैदा करने के लिए हरियाणा भाजपा सुरेश गर्ग नोच के साथ खेल रही है। जिसके चलते कभी विधायक बनने का सपना पाले राजनीति में कदम रखने वाले सुरेश गर्ग नोच के लिए कैथल मेयर पद का चुनाव जितना ही इस परिवार का राजनीतिक भविष्य  तय करेगा जिसे हरियाणा भाजपा ने अपनी तरफ से इस परिवार का राजनीति में रुतबा कम करने में कोई कोर-कसर बाकि नहीं छोड़ी।

खैर यह सब 2 सप्ताह बाद साफ़ हो जाएगा की किसको किसने मात दी।  अब जब  हरियाणा में चुनावी बिगुल बज चुका है और नामांकन के आखिरी दिन के बाद हर उम्मीदवार वोट पाने के लिए अपने-अपने वार्ड व क्षेत्र में जी जान लगा रहा है. कैथल में अबकी बार तीन जगह चुनाव हैं.

एक कैथल नगर परिषद के लिए तो गुहला व राजौंद में नगर पालिकाओं के लिए. कुर्सी की खींचतान से बचने के लिए अबकी बार चैयरमैन के चुनाव सीधा लड़ा जाएगा. जो शहर के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का काम करेगा. लोग चेयरमैन के डायरेक्ट चुनाव होने से काफी हद तक खुश हैं.

क्योंकि अगर हम कैथल की ही बात करें तो पूरे पांच साल कुर्सी के लिए खींचतान व आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चलती रही और शहर विकास की दृष्टि से पिछड़ गया. तो अबकी बार कुर्सी की खींचतान ना रहे और विकास कार्यों का पहिया ना रुके इसके लिए डायरेक्ट चुनाव हो ये बेहतर निर्णय है.

बात करें कैथल नगर परिषद के चुनावों की. यहां पर चेयरमैन की सीट की बात करें तो ये महिलाओं के लिए रिजर्व की गई है. अबकी बार चेयरपर्सन के चुनाव के लिए भाजपा-जजपा गठबंधन, इनेलो, कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार व राजकुमार सैनी की लोसुपा व आज़ाद सहित 11 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. हालांकि कांग्रेस सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ रही है. लेकिन फिर भी रणदीप सुरजेवाला ने बड़े मंथन के बाद अपना उम्मीदवार उतारा है.

नगर परिषद कैथल के प्रधान पद हेतू नामांकन करने वालों में सुरभि गर्ग, कमलेश, उमा रानी, शीबा बत्तरा, आदर्श कुमारी, सांची गर्ग, परमजीत कौर, सुदेश, सपना सैनी, पुष्पा देवी व नीलम रानी शामिल हैं. फिलहाल नामांकन के बाद सभी चेयरपर्सन उम्मीदवार मैदान में उतर चुकी हैं और वोटों के लिए जी जान लगा रहे हैं. अबकी बार चेयरपर्सन के लिए तिकोना मुकाबले की स्थिति बन रही है. असली मुकाबला भाजपा-जजपा गठबंधन, आम आदमी पार्टी व कांग्रेस की तरफ से रणदीप सुरजेवाला की उम्मीदवार आदर्श थरेजा में हैं.

 बेशक कांग्रेस पार्टी चुनाव चिन्ह  पर चुनाव नहीं लड़ रही. लेकिन फिर भी रणदीप सुरजेवाला अपनी साख की लड़ाई में पीछे रहने वाले नहीं हैं. अब बात करें किसका पलड़ा भारी है तो जब भी तिकोनी चुनावी मुकाबला होता है तो मौजूदा सरकार को फायदा होने की ज्यादा उम्मीद होती है. लेकिन वर्तमान हरियाणा की बीजेपी सरकार के पिछेले कार्यों की समीक्षा को देखते हुए कैथल मेयर चुनाव में फायदा कम और नुकशान ज्यादा होने की उम्मीद है और इसका सबसे बड़ा कारण मनोहर सरकार का आम जनता के प्रति घटिया रवैया माना जा रहा है। क्योंकि हरियाणा की जनता ने बीजेपी के मनोहर लाल को मुख्यमंत्री बनाया था ,हरियाणा की जनता का  मालिक नहीं इसलिए नगर परिषद चुनाव में कैथल ही नहीं पुरे हरियाणा में इसका खमियाजा कमल फूल के चुनाव चिन्ह वालों को भुगतना पड़ेगा। इसलिए  तो इस लिहाज से अभी तक कैथल सीट पर किसी एक का पलड़ा भारी है कहना बहुत मुश्किल है। हाँ  भाजपा-जजपा अलग अलग नगर निकाय चुनाव लड़ती तो उन्हें नुकसान झेलना पड़ सकता था. लेकिन पार्टी आलाकमान ने सही वक्त पर फैसला लेकर अपनी आदत के अनुसार यू टर्न ले ही लिया। यानी कह कर जुबान से मुकरना हरियाणा बीजेपी ने बखूबी निभा कर हरियाणा की राजनीति में दिखाया है। बात करें आम आदमी पार्टी की तो पंजाब में चुनाव जीतने के बाद नगर निकाय चुनाव चुनावों से हरियाणा में एंट्री पाना चाहते हैं जिसके चलते पार्टी कार्यकर्ताओं में तो उत्साह है लेकिन पार्टी ने रामप्रताप गुप्ता को अचानक पार्टी में शामिल कर टिकट भी दे दिया पार्टी कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रहा बेशक कैथल मेयर चुनाव में पैसा ही पैसा बहाया जा रहा है लेकिन रामप्रताप गुप्ता परिवार के लिए   कैथल में राह इतनी आसान नजर नहीं आ रही. क्योंकि एक तो टिकट अपना ट्रैक छोड़कर किसी आम आदमी को नहीं बल्कि शहर के खास आदमी को दी है. अब बात आती है कांग्रेस की तो कैथल ही नहीं पूरे हरियाणा में आपसी खींचतान की वजह से जमीन ढीली ही नजर आ रही है. लेकिन रणदीप सुरजेवाला अपने किये कामों के श्रेय के दम पर उम्मीदवार को जिताने की होड़ में लगे हैं.और रणदीप सुरजेवाला को इसका श्रेय मिलना भी चाहिए क्योंकि पिछले विधान सभा चुनावों में बीजेपी के लीला राम को जिताने वाली कैथल की जनता अब पछता भी रही है क्योंकि शहर में विकास होना तो कोसो दूर कैथल वर्षों पीछे पहुंच गया या फिर बीजेपी की नीतियों ने कैथल शहर के ऐसे हालत कर दिए जिसके चलते आज बीजेपी का साथ देने वाले खुद अंदर खाते रणदीप को हराने का अफ़सोस मना रहे है जिसने  कैथल को भारत के मान चित्र पर दर्शाने का काम किया था।

इसलिए कैथल मेयर चुनाव में अभी कुछ कहना बहुत जल्दबाजी होगा की कैथल से बीजेपी-जेजेपी प्रत्याशी जीत  रही है या फिर  आप की  नीलम रानी का अग्रवाल हार रही है। अग्रवाल समाज कभी एकजुट नहीं हुआ और ना होगा मामला राजनीतिक हो ,सामाजिक हो हमेशा अग्रवाल समाज के अपने ही लोगों ने समाज को गिरवी बना कर रख छोड़ा इसलिए अग्रवाल का हारना या जितना कोई मायने नहीं रखता क्योंकि टांग-खिचाई प्रतियोगिता अग्रवाल समाज में सबसे ज्यादा होती है जिसका परिणाम हम आये दिन समाज में देखते रहते है। कैथल मेयर चुनाव का असली ब्यौरा 15 जून के बाद सामने आएगा क्योंकि तब तक अग्रवाल समाज के प्रत्याक्षी अपनी अपनी घोटियाँ फिट कर चुके होंगे जिनका फायदा कोई दूसरा आराम से उठा कर ले जाएगा। अग्रवाल समाज  में आजकल अरविन्द केजरीवाल का बोलबाला है लेकिन पार्टी उम्मीदवार में पैसे का घमंड ज्यादा दिखाई दे रहा है जो समाज हित में अच्छी बात नहीं है।  सुरजेवाला की वजह से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को कुछ वोट अग्रवाल समाज से मिल सकते हैं. उधर अगर बात करें पंजाबी समाज की तो कांग्रेस ने दांव जरूर खेला है. पंजाबी समाज की आदर्श थरेजा पर लेकिन भाजपा में कैलाश भगत और बिट्टू छाबड़ा (राइस मिल एसोसिएशन प्रधान) की भूमिका भी बड़ा रोल निभा सकती है. अब अगर यहां बात चुनावों के शुरुआती रुझानों की बात करें तो कैथल में सुरभि गर्ग का पलड़ा ही भारी नजर आ रहा है.  कैथल नगर परिषद चुनाव की मुख्य बात यह है की बेशक सुरभि गर्ग के साथ कैलाश भगत,लीला राम ,का फोटो चस्पा हो लेकिन वोट मिलेंगे ऐसा नहीं लगता क्योंकि कोई भी खिलाडी अपने सामने अपना प्रतिद्व्न्दी खड़ा करना पसंद नहीं करेगा।

यहां अगर बात पिछले प्लान की की जाए तो चेयरपर्सन सीमा कश्यप कांग्रेस समर्थित ही थी जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे और पूरे कार्यकाल में वो एक डमी चेयरपर्सन ही नजर आई. क्योंकि असल में शहर की सरकार उनके पिता चला रहे थे.

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