चानौत जल आंदोलन पर सियासत गरमाई: अभय चौटाला का सरकार पर हमला, सांसद जेपी की अपील, विधायक जस्सी का समर्थन और चढ़ूनी की चेतावनी से बढ़ा मामला
हांसी / 1 जून / अटल हिन्द टीम:
हरियाणा के हांसी क्षेत्र का गांव चानौत इस समय एक गंभीर और विस्फोटक जनआंदोलन के केंद्र में है। वर्षों से चले आ रहे पेयजल संकट ने आखिरकार ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि आंदोलन ने न केवल प्रशासन को हिला दिया बल्कि पूरे प्रदेश में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया।
गांव में चल रही भाखड़ा पेयजल परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने बड़ा कदम उठाते हुए पाइपलाइन उखाड़ दी और सड़क पर डालकर हांसी-बरवाला मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। इससे इलाके में यातायात बाधित हो गया और प्रशासन को तुरंत मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
महापंचायत बनी आंदोलन की टर्निंग प्वाइंट
चानौत गांव में पेयजल समस्या को लेकर दूसरी बार विशाल महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें केवल स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि हरियाणा के कई जिलों से किसान संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण प्रतिनिधि पहुंचे।
इस महापंचायत में माहौल बेहद गंभीर रहा। मंच से लगातार यह मांग उठती रही कि जब तक गांव को स्थायी और सुरक्षित पेयजल कनेक्शन नहीं दिया जाएगा, तब तक कोई समझौता नहीं होगा।
महापंचायत में भारी भीड़ ने इस आंदोलन को स्पष्ट रूप से एक गांव की समस्या से बढ़ाकर राज्य स्तरीय जनआंदोलन में बदल दिया।
पाइपलाइन उखाड़कर फूटा वर्षों का गुस्सा
महापंचायत खत्म होने के तुरंत बाद ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया।
ग्रामीणों ने भाखड़ा परियोजना के तहत हांसी की ओर बिछाई जा रही पाइपलाइन को मौके पर ही उखाड़ दिया।
इसके अलावा सड़क किनारे रखी पाइपों को मुख्य सड़क पर डाल दिया गया, जिससे हांसी-बरवाला मार्ग पूरी तरह ठप हो गया।
प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था—
“जब तक गांव को पानी नहीं मिलेगा, किसी भी पाइपलाइन को यहां से नहीं गुजरने दिया जाएगा।”
17 दिनों से जारी धरना, स्थिति लगातार तनावपूर्ण
ग्रामीण पिछले 17 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। उन्होंने भाखड़ा नहर आधारित जल परियोजना का काम पहले ही रोक रखा है।
उनकी मुख्य मांग है:
👉 जिस पाइपलाइन से हांसी शहर को पानी दिया जा रहा है
👉 उसी लाइन से गांव चानौत को भी स्थायी पेयजल कनेक्शन दिया जाए
ग्रामीणों का कहना है कि जब पाइपलाइन उनके गांव के बीच से गुजर रही है, तो उन्हें इस बुनियादी सुविधा से वंचित रखना अन्याय है।
प्रशासन की सख्ती, पुलिस बल तैनात
स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि अब तक प्रदर्शन पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बना हुआ है। प्रशासन का प्रयास है कि किसी तरह स्थिति को बातचीत से हल किया जाए, लेकिन ग्रामीण अपने फैसले पर अडिग हैं।
“जब तक पानी नहीं, आंदोलन खत्म नहीं” – ग्रामीण नेतृत्व
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ग्रामीण नेता अनूप चानौत ने साफ कहा कि यह अब सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है।
उन्होंने कहा:
“गांव वर्षों से पानी की किल्लत झेल रहा है। हम बार-बार प्रशासन के पास गए, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। अब जब तक हमें पाइपलाइन से सीधा कनेक्शन नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।”
पूर्व सरपंच का तीखा आरोप
पूर्व सरपंच सत्यवान दूहन ने भी सरकार और विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा:
“गर्मी में हालात और बदतर हो जाते हैं। हमने पहले ही चेतावनी दी थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब जनता खुद सड़क पर उतर चुकी है।”
आंदोलन में राजनीतिक और किसान नेताओं की एंट्री
यह आंदोलन अब केवल ग्रामीण स्तर तक सीमित नहीं रहा। इसमें अब राजनीतिक और किसान नेताओं की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिल रही है।
अभय सिंह चौटाला का तीखा हमला
इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला ने चानौत गांव में चल रहे आंदोलन को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है और विकास योजनाओं का लाभ केवल शहरों तक सीमित रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण हरियाणा की आवाज है, जिसे लंबे समय से दबाया जा रहा है।
चौटाला ने आरोप लगाया कि जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बातचीत में भी यह स्पष्ट हुआ है कि गांवों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा—
“जब तक चानौत गांव को स्थायी पेयजल कनेक्शन नहीं दिया जाता, तब तक यह आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा। सरकार को ग्रामीणों की पीड़ा समझनी चाहिए, वरना यह आग पूरे प्रदेश में फैल सकती है।”
हिसार सांसद जयप्रकाश (जेपी) की संतुलित अपील
हिसार से सांसद जयप्रकाश (जेपी) ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाते हुए ग्रामीणों की मांग को पूरी तरह जायज बताया।
उन्होंने कहा कि गांव के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
सांसद ने प्रशासन और सरकार से अपील की कि वे जल्द से जल्द बातचीत के माध्यम से समाधान निकालें ताकि स्थिति और अधिक तनावपूर्ण न बने।
उन्होंने कहा—
“यह केवल आंदोलन नहीं बल्कि बुनियादी अधिकारों की लड़ाई है। सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके।”
विधायक जस्सी पेटवाड़ का समर्थन
नारनौंद के विधायक जस्सी पेटवाड़ ने भी चानौत गांव के ग्रामीणों के समर्थन में खुलकर बयान दिया।
उन्होंने कहा कि गांव के लोग वर्षों से पानी की गंभीर समस्या झेल रहे हैं और यह पूरी तरह न्यायसंगत मांग है कि उन्हें भी उसी पाइपलाइन से स्थायी कनेक्शन दिया जाए, जिससे शहर को पानी मिल रहा है।
विधायक ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीणों का धैर्य अब टूट चुका है और अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
उन्होंने कहा—
“गांव के लोगों का पानी पर उतना ही अधिकार है जितना शहर के लोगों का है। इस अधिकार को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की चेतावनी
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इस आंदोलन को लेकर बेहद सख्त और चेतावनी भरा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि इस मुद्दे को हल्के में ले रही है तो यह उसकी बड़ी भूल होगी। चानौत गांव का आंदोलन केवल एक स्थानीय संघर्ष नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा के किसानों और ग्रामीणों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है।
चढ़ूनी ने चेतावनी देते हुए कहा—
“अगर सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया तो यह आंदोलन चानौत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हरियाणा में फैल सकता है। किसान और ग्रामीण अब अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो चुके हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को सड़क पर उतरना पड़ रहा है, जो शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
हांसी-बरवाला रोड पर असर, आम जनता परेशान
पाइपलाइन उखाड़े जाने और सड़क जाम होने से हांसी-बरवाला मार्ग पर लंबा जाम लग गया। स्थानीय लोगों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
व्यापार और दैनिक आवाजाही भी प्रभावित हुई।
भाखड़ा परियोजना पर भी संकट के बादल
68 करोड़ रुपये की भाखड़ा पेयजल परियोजना, जिसे हांसी शहर के लिए एक महत्वपूर्ण योजना माना जा रहा था, अब इस आंदोलन के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
प्रशासन के अनुसार अगर देरी हुई तो हांसी शहर में पानी आपूर्ति की समयसीमा भी आगे बढ़ सकती है।
पानी का संकट बना सामाजिक मुद्दा
चानौत गांव की यह लड़ाई अब केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीण अधिकार, बुनियादी सुविधाओं और विकास मॉडल पर बड़ा सवाल बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पीने का पानी नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी विकास परियोजना उनके लिए स्वीकार्य नहीं होगी।
हरियाणा में जल संकट के प्रमुख उदाहरण
हरियाणा देश के सबसे गंभीर भूजल संकट वाले राज्यों में शामिल है। राज्य में भूजल दोहन दर 136% से अधिक है, और कई जिलों में जल स्तर तेजी से गिर रहा है। चानौत जैसे स्थानीय विरोधों के अलावा पूरे प्रदेश में पानी की कमी, प्रदूषण और शहरी-ग्रामीण असंतुलन के अनेक मामले सामने आए हैं।1. भूजल स्तर का तेजी से ह्रास (Red Zone गांव)हरियाणा में 1948 गांव रेड जोन में आ चुके हैं, जहां भूजल स्तर critically गिर रहा है।
सबसे प्रभावित जिले: अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद।
2014-2024 के बीच औसत गिरावट 5.41 मीटर दर्ज की गई। अंबाला में 10.5 मीटर से बढ़कर 29 मीटर नीचे पहुंच गया।
कई गांवों में ट्यूबवेल 40 मीटर से भी गहरे खोदने पड़ रहे हैं, जिससे छोटे किसान प्रभावित हो रहे हैं।
2. रोहतक और झज्जर में प्रदूषित पानी संकट (2026)रोहतक और झज्जर के कई इलाकों में काला, बदबूदार और गंदा पानी सप्लाई हो रहा है।
निवासियों को टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। यह इंदौर जैसे बड़े प्रदूषण संकट की याद दिलाता है।
3. सिरसा और घग्गर बेल्ट में रासायनिक प्रदूषणघग्गर नदी के किनारे गांवों में उच्च TDS, फ्लोराइड और नाइट्रेट स्तर पाया गया।
पानी पीने लायक नहीं होने से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। सांसद कुमारी सैलजा ने इस मुद्दे को उठाया है।
4. भाखड़ा नहर पानी का विवाद (पंजाब-हरियाणा)पंजाब द्वारा भाखड़ा नहर से हरियाणा को मिलने वाला पानी घटाकर 9500 से 4000 क्यूसेक कर दिया गया।
इससे भिवानी, सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, रोहतक, महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में सिंचाई और पेयजल संकट गहराया।
5. गुरुग्राम-फरीदाबाद में भूमि धंसना (Land Subsidence)अत्यधिक भूजल निकासी से फरीदाबाद और गुरुग्राम क्षेत्र में जमीन धंस रही है (कुछ जगहों पर 4-5 cm प्रति वर्ष)।
दिल्ली के पास के इलाकों में यह समस्या और गंभीर है।
6. अन्य उल्लेखनीय उदाहरणधारोड़ी गांव (हिसार): किसानों ने साफ पानी की मांग को लेकर लंबे समय तक प्रदर्शन किए।
फतेहाबाद, भिवानी और रेवाड़ी: गर्मी के मौसम में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
कई जिलों में पानी की गुणवत्ता खराब होने से स्वास्थ्य संकट (जैसे दस्त, Typhoid) की घटनाएं बढ़ी हैं।
कारणग्रीन रेवोल्यूशन के बाद धान की खेती का विस्तार
फ्री/सस्ती बिजली से बेलगाम ट्यूबवेल
शहरीकरण और औद्योगिक मांग
कैनाल पानी का असमान वितरण
हरियाणा सरकार अटल भुजल योजना, वर्षा जल संचयन और फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। चानौत का आंदोलन इसी बड़े संकट का एक हिस्सा है, जो दर्शाता है कि बुनियादी पेयजल सुविधा अब ग्रामीण स्तर पर भी बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है।स्रोत: विभिन्न समाचार रिपोर्ट्स और सरकारी आंकड़ों (2023-2026) पर आधारित।

