PM मोदी को याद आया जींद का ‘दूध-दही’, आखिर क्यों इस भैंस को कहते हैं हरियाणा का ‘काला सोना’?
जींद/नरवाना 17 जुलाई 2026 /अटल हिन्द डेस्क /नरेंद्र जेठी
हरियाणा के जींद से एक बेहद दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। मौका था देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने का, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहाँ पहुंचकर राजनीति से इतर एक अलग ही रंग जमा दिया। पीएम मोदी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए हरियाणवी खान-पान, यहाँ के घेवर, बूरे और सबसे खास—’मुर्रा भैंस’ के दूध-दही का जिक्र किया।
नरेंद्र मोदी ने बताया कि पीएम या सीएम बनने से बहुत पहले, जब वह संगठन के काम से जींद आते थे, तो कैसे दोस्तों के साथ स्कूटर पर घूमते थे और यहाँ के दूध-दही का स्वाद लेते थे।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीएम मोदी ने जिस मुर्रा भैंस का नाम इतनी आत्मीयता से लिया, उसे हरियाणा और पंजाब में ‘ब्लैक गोल्ड’ (काला सोना) क्यों कहा जाता है? और यह कैसे आम भैंसों से अलग है? चलिए, आज आसान शब्दों में इस “सुपर कमाऊ” भैंस की पूरी कहानी समझते हैं।
1. क्यों कहते हैं इसे ‘काला सोना’ (Black Gold)?
डेयरी इंडस्ट्री में मुर्रा भैंस किसी जैकपॉट से कम नहीं है। मूल रूप से यह हरियाणा के जींद, रोहतक, हिसार और पंजाब के बेल्ट में पाई जाती है। अपनी बेमिसाल दूध देने की क्षमता के कारण आज यह पूरे देश के पशुपालकों की पहली पसंद बन चुकी है।
इसकी मांग सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बहुत ज्यादा है। किसानों के लिए यह भैंस सीधे तौर पर मुनाफे की गारंटी है, इसलिए इसे प्यार से ‘काला सोना’ पुकारा जाता है।
2. दूध देने का मशीन है यह भैंस!
मुर्रा भैंस की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका रिकॉर्ड तोड़ दूध उत्पादन है:
रोजाना का उत्पादन: जहाँ एक आम भैंस 6 से 10 लीटर दूध देती है, वहीं एक सेहतमंद मुर्रा भैंस हर दिन 15 से 25 लीटर तक दूध दे सकती है। अच्छी देखरेख मिले तो यह आंकड़ा 30 लीटर रोजाना तक भी छू जाता है।
ब्यात काल (Lactation Period): बछड़े को जन्म देने के बाद के 9 से 10 महीनों में यह करीब 1500 से 2500 लीटर तक दूध दे देती है।
मलाईदार गाढ़ा दूध: इसके दूध में फैट (वसा) की मात्रा 7 से 8 प्रतिशत होती है। यही वजह है कि इसका दूध बेहद गाढ़ा होता है और इससे घी व मावा प्रचुर मात्रा में निकलता है।
3. आसमान छूती हैं कीमतें
अगर आप एक असली मुर्रा भैंस खरीदने जाएंगे, तो इसकी कीमत सुनकर दंग रह जाएंगे:
एक सामान्य मुर्रा भैंस की शुरुआत ही ₹60,000 से ₹1,00,000 के बीच होती है।
अगर भैंस शुद्ध नस्ल की है और दूध का रिकॉर्ड शानदार है, तो इसकी कीमत ₹1.5 लाख से ₹2.5 लाख या उससे भी ऊपर चली जाती है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि राष्ट्रीय पशु मेलों में बेहतरीन नस्ल के मुर्रा झोटों (सांड) और भैंसों की बोलियां तो कई लाख रुपये तक लग जाती हैं!
4. आम भैंस और मुर्रा में फर्क कैसे करें?
अक्सर लोग धोखा खा जाते हैं कि सामने खड़ी भैंस असली मुर्रा है या नहीं। पशु डॉक्टरों के अनुसार, असली मुर्रा को आप इन 4 तरीकों से तुरंत पहचान सकते हैं:
जलेबी जैसे मुड़े हुए सींग: यह इसकी सबसे बड़ी पहचान है। मुर्रा के सींग बिल्कुल छोटे और अंदर की तरफ जलेबी की तरह घूमे हुए होते हैं। आम भैंस के सींग सीधे, चपटे या पीछे फैले होते हैं।
बिल्कुल जेट ब्लैक रंग: मुर्रा भैंस का रंग कोयले जैसा गहरा और चमकदार काला होता है। आम भैंसें मटमैली या भूरे रंग की भी दिख सकती हैं।
सिर और गर्दन: इसका सिर छोटा, सुडौल और गर्दन लंबी व सुंदर होती है, जबकि आम भैंसों का सिर भारी और बड़ा होता है।
सफेद बालों वाली पूंछ: मुर्रा भैंस के भारी शरीर के अंत में जो पूंछ होती है, उसके निचले हिस्से पर अक्सर कुछ सफेद बाल देखने को मिलते हैं।
5. किसानों के लिए क्यों है यह ‘वरदान’?
दूध के अलावा भी इस भैंस में कुछ ऐसी कमाल की खूबियां हैं, जो इसे पालने में रिस्क बिल्कुल शून्य (zero) कर देती हैं:
बीमारियों से लड़ने की ताकत: विदेशी नस्ल की गायों (जैसे जर्सी या एचएफ) की तरह मुर्रा भैंस बार-बार बीमार नहीं पड़ती। इसकी इम्यूनिटी बहुत मजबूत होती है।
मौसम की मार झेलने में माहिर: भारत की तपती गर्मी हो या कड़ाके की ठंड, यह हर मौसम को आसानी से बर्दाश्त कर लेती है।
लंबा साथ: यह अपने जीवनकाल में 10 से 12 बार बच्चे (ब्यात) दे सकती है, यानी एक बार निवेश करने पर यह सालों-साल किसान का घर चलाती है।
तो अगली बार जब आप हरियाणा या पंजाब के गाढ़े दूध का स्वाद लें, तो समझ जाइएगा कि इसके पीछे इसी ‘ब्लैक गोल्ड’ की मेहनत है, जिसकी तारीफ खुद देश के प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं!

