करनाल में 34 करोड़ रुपये की जिला परिषद बिल्डिंग की गुणवत्ता पर सवाल, दो कार्यकारी अभियंता निलंबित
करनाल//30 मई / अटल हिन्द ब्यूरो
हरियाणा के करनाल में निर्माणाधीन जिला परिषद भवन की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचायती राज विभाग के दो कार्यकारी अभियंताओं (एक्सईएन) को निलंबित कर दिया है। मामला करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से बन रही पांच मंजिला जिला परिषद इमारत से जुड़ा है।
निलंबित अधिकारियों में वर्तमान में कैथल में तैनात तत्कालीन एक्सईएन परमिंद्र सिंह तथा करनाल में कार्यरत एक्सईएन नारायण दत्त शर्मा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच के लिए विभाग के मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार पंचायती राज विभाग की क्वालिटी कंट्रोल विंग ने निर्माणाधीन भवन के कुछ पिलरों में तकनीकी खामियों से संबंधित तस्वीरें मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी थीं। तस्वीरों में कुछ पिलर और संरचनात्मक हिस्से टेढ़े दिखाई देने पर मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद दोनों कार्यकारी अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि भवन निर्माण कार्य की निगरानी एक्सईएन नारायण दत्त शर्मा के अधीन की जा रही थी। यह परियोजना दिसंबर 2026 तक पूरी होनी है, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान ही भवन की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
चंडीगढ़ से पहुंची जांच टीम
मामला सामने आने के बाद पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जांच टीम चंडीगढ़ से करनाल पहुंची। टीम ने निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया और निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों तथा क्वालिटी कंट्रोल विंग की रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की।
सूत्रों के अनुसार जांच समिति भवन के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, तकनीकी डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया की भी जांच करेगी। साथ ही निर्माण कार्य कर रही कंपनी की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है और उसके खिलाफ कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
अधिकारियों ने खारिज किए आरोप
वहीं निलंबित अधिकारियों और विभागीय इंजीनियरों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरी तरह निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा है। उनका दावा है कि भवन के पिलरों और बीम में कोई तकनीकी खामी नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार क्वालिटी कंट्रोल विंग द्वारा ली गई तस्वीरों का एंगल सही नहीं था, जिसके कारण पिलर और बीम टेढ़े दिखाई दिए। उनका कहना है कि तकनीकी जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


