राष्ट्रीय शिक्षा रैंकिंग में केरल को पछाड़कर पंजाब द्वारा बड़ी छलांग, बोर्ड टॉपरों में लड़कियों के बढ़ते दबदबे और जेईई मेन में सरकारी स्कूलों के 359 विद्यार्थियों की सफलता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य की ‘शिक्षा क्रांति’ के जमीनी स्तर पर सार्थक नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं।
चंडीगढ़ /31 मई /अटल हिन्द ब्यूरो
पंजाब में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के चार साल बाद भगवंत मान सरकार अब एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। सरकार का उद्देश्य पंजाब को देश का अग्रणी शिक्षा केंद्र बनाना है और इस धारणा को बदलना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल विदेशों में ही संभव है।

राज्य सरकार के अनुसार, शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा रैंकिंग में पंजाब ने कई राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। साथ ही बोर्ड परीक्षाओं में लड़कियों का बढ़ता प्रदर्शन और जेईई मेन जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों के 359 विद्यार्थियों का चयन इस बदलाव को मजबूत करता है।
चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में आयोजित ‘सितारे ज़मीन पर’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के जिला टॉपर्स को सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूल अब केवल प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे, बल्कि उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले जिन सरकारी स्कूलों को लेकर नकारात्मक धारणा थी, आज वे आत्मविश्वास और बेहतर परिणामों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में सुधारों का असर जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है।
सीएम मान ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि समान अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संयुक्त रूप से पहला स्थान दिया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब के सरकारी स्कूल कई मामलों में केरल जैसे राज्यों से आगे निकल चुके हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता के बावजूद हमेशा विनम्र रहना चाहिए और अपने शिक्षकों व माता-पिता का सम्मान करना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण के लिए विदेशों में भेज रही है, ताकि वे नई शिक्षण तकनीकों को अपनाकर उन्हें राज्य के स्कूलों में लागू कर सकें। इसके अलावा, “स्कूल ऑफ एमिनेंस” और कौशल विकास योजनाओं के जरिए शिक्षा को आधुनिक बनाया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि पहले राज्य के कई स्कूलों में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और बुनियादी सुविधाएं बेहतर हुई हैं।

वहीं, पंजाब के प्रभारी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की जरूरत है। उन्होंने मौजूदा परीक्षाओं को समय के अनुरूप नहीं बताते हुए समग्र मूल्यांकन प्रणाली अपनाने की वकालत की।
कार्यक्रम में छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सरकारी स्कूलों में आए बदलावों ने उनके आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं को मजबूत किया है।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, स्कूल शिक्षा मूल्यांकन में पंजाब ने कई राज्यों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थानों में जगह बनाई है। इसके अलावा, जेईई मेन में 359 सरकारी स्कूल छात्रों का चयन और ‘फिजिक्स वाला’ के साथ कोचिंग साझेदारी जैसी पहल शिक्षा सुधारों को और गति दे रही हैं।


