छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED का अब तक का सबसे बड़ा शिकंजा, 1000 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क, 85 आरोपी जांच के घेरे में
2019 से 2023 के बीच 2883 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई का दावा; गोवा का लग्जरी होटल, प्लॉट, बैंक जमा, शेयर और म्यूचुअल फंड भी अटैच
नई दिल्ली /1 जून / अटल हिन्द टीम
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 1000 करोड़ रुपये से अधिक बाजार मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर दिया है। यह कार्रवाई कथित धन शोधन और अवैध वित्तीय लेन-देन की जांच के तहत की गई है, जिसने राज्य की आबकारी व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।
ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा 28 मई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत तीन अलग-अलग प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार इन संपत्तियों का दस्तावेजी मूल्य लगभग 200 करोड़ रुपये है, जबकि मौजूदा बाजार मूल्य 1000 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।
यह कार्रवाई आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर चल रही जांच का हिस्सा है।
2883 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई का दावा
ईडी की जांच में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच एक संगठित शराब सिंडिकेट ने आबकारी प्रणाली में कथित हेरफेर कर लगभग 2883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क के संचालन में कारोबारी अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की प्रमुख भूमिका रही। साथ ही कुछ सरकारी अधिकारियों, डिस्टिलरी संचालकों और निजी कंपनियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
ईडी के अनुसार शराब खरीद दरों में कथित कृत्रिम वृद्धि, बिना लेखा-जोखा वाली शराब की बिक्री और एफएल-10ए लाइसेंस व्यवस्था के माध्यम से कमीशन वसूली कर बड़े पैमाने पर धन अर्जित किया गया।
विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई
पहले प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है।
ईडी का आरोप है कि विकास अग्रवाल सिंडिकेट के वित्तीय संचालन का प्रमुख हिस्सा था और विभिन्न डिस्टिलरी संचालकों तथा लाइसेंसधारकों से एकत्र धन को नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने का कार्य करता था।
जांच एजेंसी ने परिवारजनों के नाम पर दर्ज कुछ संपत्तियों को भी कथित अपराध से अर्जित आय के समतुल्य मानते हुए अटैच किया है।
इसके अलावा रायपुर स्थित ढेबर सिटी होम्स के कई प्लॉट और कथित बेनामी निवेश से खरीदी गई भूमि संपत्तियों को भी कुर्क किया गया है। इस कार्रवाई में लगभग 30 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां शामिल हैं।
गोवा का लग्जरी होटल भी जांच के घेरे में
ईडी की दूसरी बड़ी कार्रवाई गोवा के अंजुना क्षेत्र में स्थित लग्जरी होटल वेस्टिन गोवा पर हुई है।
जांच एजेंसी का दावा है कि होटल की खरीद में लगभग 110 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और यह राशि कथित रूप से शराब घोटाले से प्राप्त नकदी से जुटाई गई थी।
ईडी के अनुसार होटल का स्वामित्व पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास है, जिसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि बड़ी मात्रा में नकदी को विभिन्न स्थानों तक भौतिक रूप से पहुंचाया गया और उसके माध्यम से निवेश किए गए।
बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड भी जब्त
तीसरे अटैचमेंट ऑर्डर के तहत तीन एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों—
- ओम साई बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड
- डिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड
- नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड
से जुड़े बैंक जमा, शेयर और म्यूचुअल फंड निवेशों को कुर्क किया गया है।
ईडी का आरोप है कि इन कंपनियों को अपने लाभ का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा कथित रूप से सिंडिकेट को देना पड़ता था। जांच एजेंसी के अनुसार इस माध्यम से लगभग 51 करोड़ रुपये की राशि नेटवर्क तक पहुंचाई गई।
चार नए आरोपी शामिल
मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
ईडी ने विशेष पीएमएलए न्यायालय, रायपुर में छठा पूरक अभियोजन शिकायत पत्र दाखिल करते हुए चार नए आरोपियों को शामिल किया है।
इनमें—
- विजय भाटिया
- टी. भुनेश्वर राव
- प्रबीर शर्मा
- निखिल चंद्राकर
के नाम शामिल हैं।
ईडी का आरोप है कि विजय भाटिया का एक लाइसेंसधारी कंपनी में कथित बेनामी निवेश था, जबकि प्रबीर शर्मा पर करोड़ों रुपये नकद परिवहन करने का आरोप लगाया गया है।
नए नाम जुड़ने के बाद इस मामले में पीएमएलए के तहत आरोपित व्यक्तियों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है।
जांच अभी जारी
ईडी का कहना है कि शराब घोटाले से जुड़े कथित धन शोधन नेटवर्क, शेल कंपनियों, बेनामी निवेशों और अन्य लाभार्थियों की पहचान के लिए जांच जारी है।
जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में और संपत्तियां कुर्क की जा सकती हैं तथा नए नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ईडी द्वारा लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अंतिम दोषसिद्धि या निर्दोषता का निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।


