2015 से अवैध घोषित इमारत पर कार्रवाई नहीं हुई, हाई कोर्ट के निर्देश और पुलिस चेतावनी भी बेअसर; पांच मंजिला भवन ढहने से दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस
नई दिल्ली /1 जून / अटल हिन्द टीम
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के निकट सैदुलाजाब क्षेत्र में पांच मंजिला इमारत ढहने की दर्दनाक घटना ने देशभर का ध्यान एक बार फिर अवैध निर्माण, प्रशासनिक लापरवाही और शहरी सुरक्षा व्यवस्था की ओर खींच लिया है। शनिवार शाम हुए इस हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं। राहत एवं बचाव दल ने मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला, लेकिन कई परिवारों के लिए यह हादसा जीवनभर का दुख छोड़ गया।
प्रारंभिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों से संकेत मिल रहे हैं कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक अनदेखी और नियमों की अवहेलना का परिणाम हो सकती है। सबसे गंभीर तथ्य यह है कि जिस भवन के मलबे में लोगों की जान गई, उसे नगर निगम ने एक दशक पहले ही अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित कर दिया था।
2015 में मिली थी पहली चेतावनी
जानकारी के अनुसार लगभग 700 वर्ग गज क्षेत्र में निर्मित इस भवन को वर्ष 2015 में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने अनधिकृत निर्माण की श्रेणी में रखा था। उस समय अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन मामला कागजों और फाइलों तक ही सीमित रह गया। भवन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और उसका उपयोग लगातार जारी रहा।
हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
वर्ष 2021 में मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा। अदालत के निर्देशों के बाद एमसीडी ने भी स्वीकार किया कि भवन अवैध है और इसे ध्वस्त किया जाना चाहिए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि ध्वस्तीकरण का निर्णय होने के बावजूद भवन को गिराया नहीं गया। इसके बजाय उसमें किरायेदारों का रहना और व्यावसायिक गतिविधियां चलती रहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत के निर्देशों का समय पर पालन किया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था।
पुलिस ने दी थी चेतावनी
मार्च 2026 में स्थानीय पुलिस ने एमसीडी को दो अलग-अलग पत्र भेजकर जानकारी दी थी कि भवन पर अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया जा रहा है। पुलिस ने आशंका जताई थी कि चौथी और पांचवीं मंजिल के निर्माण से भवन की संरचनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है और यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
सूत्रों के अनुसार एमसीडी ने इन पत्रों की प्राप्ति स्वीकार भी की थी, लेकिन निर्माण रोकने, भवन खाली कराने या संरचनात्मक जांच कराने जैसे जरूरी कदम नहीं उठाए गए।
कुछ ही सेकंड में मलबे में बदली इमारत
शनिवार शाम लगभग 7:40 बजे यह भवन अचानक भरभराकर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पूरी इमारत कुछ ही सेकंड में ताश के पत्तों की तरह ढह गई। उस समय आसपास बड़ी संख्या में छात्र, स्थानीय निवासी और दुकानदार मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि कुछ छात्र कोचिंग संस्थानों से लौटकर पास की कैंटीन में भोजन कर रहे थे, तभी भवन गिर गया। धमाके जैसी आवाज सुनकर आसपास अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
छह मौतें, कई घायल
राहत एवं बचाव दल ने घंटों अभियान चलाकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला। अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि सात घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई की होती तो उनके प्रियजनों की जान बच सकती थी।
मालिक फरार, केस दर्ज
हादसे के बाद भवन मालिक के फरार होने की सूचना है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि भवन निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेजों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
सरकार ने दिए जांच के आदेश
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। वहीं एमसीडी ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए दो अभियंताओं को निलंबित कर दिया है।
हालांकि स्थानीय नागरिकों और मृतकों के परिजनों का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि वर्षों तक नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों, भवन मालिक और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू
हादसे के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि दिल्ली में हजारों ऐसे भवन मौजूद हैं जो सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि साकेत की घटना केवल एक इमारत के गिरने का मामला नहीं बल्कि शहरी प्रशासन की गंभीर विफलता का प्रतीक है।
देशभर के शहरों के लिए चेतावनी
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। देश के कई महानगरों और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में अवैध निर्माण, कमजोर निगरानी और प्रशासनिक ढिलाई जैसी समस्याएं मौजूद हैं। यदि समय रहते संरचनात्मक ऑडिट, नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति हो सकती है।
घटनाक्रम एक नजर में
2015: एमसीडी ने भवन को अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित किया।
2021: दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद भवन को ध्वस्त करने का निर्णय लिया गया।
2021-2026: ध्वस्तीकरण नहीं हुआ, भवन का उपयोग जारी रहा।
मार्च 2026: पुलिस ने अवैध अतिरिक्त निर्माण को लेकर दो बार चेतावनी भेजी।
31 मई 2026: पांच मंजिला भवन ढह गया, छह लोगों की मौत और कई घायल।


