विदेश से MBBS करने वाले छात्रों के लिए हरियाणा मेडिकल काउंसिल की चेतावनी, दाखिले से पहले मान्यता जांचना जरूरी
कई विदेशी मेडिकल संस्थानों में नियमों के उल्लंघन की शिकायतें, NMC के FMGL नियम-2021 का पालन नहीं करने पर भारत में डॉक्टर बनने में आ सकती है परेशानी
चंडीगढ़, 24 जुलाई 2026 / न्यूज रिसोर्स / अटल हिन्द ब्यूरो
विदेश जाकर एमबीबीएस की पढ़ाई करने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। काउंसिल ने छात्रों को सलाह दी है कि वे किसी भी विदेशी मेडिकल विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता, पाठ्यक्रम, क्लिनिकल ट्रेनिंग और भारत में डिग्री की स्वीकार्यता की पूरी जांच कर लें।
काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई छात्र ऐसे विदेशी मेडिकल संस्थान से मेडिकल डिग्री प्राप्त करता है, जो नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट (FMGL) रेगुलेशन-2021 के अनुरूप नहीं है, तो भविष्य में भारत में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने और चिकित्सा सेवा शुरू करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
विदेशी MBBS में दाखिले से पहले नियमों को समझना जरूरी
हरियाणा मेडिकल काउंसिल के अनुसार, विदेश से मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए केवल कम फीस या आसान प्रवेश प्रक्रिया को आधार बनाकर फैसला लेना उचित नहीं है। भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए विदेशी डिग्री को मान्यता मिलने के लिए एनएमसी के नियमों को पूरा करना अनिवार्य है।
FMGL नियम-2021 के तहत प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
विदेशी मेडिकल पाठ्यक्रम की अवधि कम से कम 54 महीने (4.5 वर्ष) होनी चाहिए।
पूरी मेडिकल शिक्षा एक ही विदेशी विश्वविद्यालय या संस्थान से पूरी करनी होगी।
इसके बाद 12 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप भी उसी विदेशी विश्वविद्यालय या उससे संबद्ध अस्पताल में करनी होगी।
क्लिनिकल ट्रेनिंग को अलग-अलग देशों या अलग-अलग संस्थानों में बांटकर पूरा करना मान्य नहीं होगा।
मेडिकल पाठ्यक्रम का माध्यम अंग्रेजी होना आवश्यक है।
पढ़ाई में एनएमसी द्वारा निर्धारित सभी जरूरी विषय शामिल होने चाहिए।
विदेशी मेडिकल विश्वविद्यालय को अपने देश की संबंधित मेडिकल नियामक संस्था से मान्यता प्राप्त होना चाहिए।
काउंसिल ने कहा है कि नियमों को पूरा नहीं करने वाली मेडिकल डिग्री के आधार पर भारत में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण मिलना मुश्किल हो सकता है।
एजेंटों के दावों से सावधान रहने की सलाह
हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने छात्रों और अभिभावकों को निजी एजेंटों तथा संस्थानों के आकर्षक दावों से सतर्क रहने को कहा है।
काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि कोई भी एजेंट या संस्था NEET परीक्षा पास किए बिना वैध मेडिकल प्रवेश या भारत में डॉक्टर बनने की गारंटी नहीं दे सकती।
छात्रों को सलाह दी गई है कि:
फीस जमा करने से पहले कॉलेज की मान्यता जरूर जांचें।
केवल आधिकारिक वेबसाइट और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें।
एजेंटों के मौखिक वादों पर भरोसा न करें।
संबंधित देश में भारतीय दूतावास और एनएमसी से जानकारी की पुष्टि करें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत तुरंत संबंधित विभाग को करें।
इन विदेशी मेडिकल संस्थानों को लेकर बरतने को कहा गया सतर्कता
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हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने कुछ विदेशी मेडिकल संस्थानों में प्रवेश को लेकर छात्रों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
क्रम संख्या मेडिकल संस्थान देश
1 बुखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट (BSMI) उज्बेकिस्तान
2 समरकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी (SSMU) उज्बेकिस्तान
3 ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी (TSMU) उज्बेकिस्तान
4 ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी की टर्मेज शाखा उज्बेकिस्तान
5 TIT इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बेंगलुरु (TSMU टर्मेज शाखा से जुड़े ऑफशोर कैंपस मॉडल के संदर्भ में) भारत-उज्बेकिस्तान मॉडल
6 सेंट्रल अमेरिकन हेल्थ एंड साइंसेज यूनिवर्सिटी बेलीज
7 कोलंबस सेंट्रल यूनिवर्सिटी बेलीज
8 वाशिंगटन यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज बेलीज
ऑफशोर कैंपस मॉडल पर भी उठे सवाल
काउंसिल के अनुसार, उज्बेकिस्तान के कुछ मेडिकल संस्थानों को लेकर नियमों के पालन से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं। इनमें विशेष रूप से ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी की टर्मेज शाखा और बेंगलुरु स्थित TIT इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के बीच संचालित ऑफशोर कैंपस मॉडल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
मेडिकल शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार छात्र कम फीस, आसान दाखिले या भारत में कुछ समय पढ़ाई कराने जैसे दावों से प्रभावित होकर प्रवेश ले लेते हैं। लेकिन बाद में जब वे भारत में मेडिकल पंजीकरण के लिए आवेदन करते हैं तो उन्हें नियमों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
विदेश से MBBS करने वालों के लिए हरियाणा मेडिकल काउंसिल की चेतावनी, दाखिले से पहले जांचें मान्यता
विदेश से MBBS करने वालों के लिए FMGE और NExT परीक्षा का महत्व
विदेश से मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को भारत में डॉक्टर के रूप में काम करने के लिए निर्धारित लाइसेंस परीक्षा पास करनी होती है।
वर्तमान व्यवस्था में विदेशी मेडिकल स्नातकों को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMGE) पास करना आवश्यक होता है। भविष्य में लागू होने वाली नेशनल एग्जिट टेस्ट (NExT) व्यवस्था के तहत भी विदेशी मेडिकल स्नातकों को नियमों का पालन करना होगा।
यदि किसी छात्र की मेडिकल डिग्री एनएमसी के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होती है, तो उसे परीक्षा और पंजीकरण प्रक्रिया में परेशानी आ सकती है।
छात्रों के लिए काउंसिल की महत्वपूर्ण सलाह
हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने छात्रों से अपील की है कि विदेश में मेडिकल शिक्षा का फैसला लेने से पहले जल्दबाजी न करें।
छात्रों को चाहिए कि
विदेशी मेडिकल कॉलेज की मान्यता की जांच करें।
NMC के FMGL नियम-2021 को समझें।
कॉलेज की क्लिनिकल ट्रेनिंग व्यवस्था की जानकारी लें।
फीस जमा करने से पहले सभी दस्तावेजों की पुष्टि करें।
किसी भी एजेंट के दावे को आधिकारिक स्रोत से सत्यापित करें।
मेडिकल शिक्षा में बढ़ते विदेशी विकल्प और सावधानी की जरूरत
भारत में मेडिकल सीटों की सीमित संख्या और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण हर साल बड़ी संख्या में छात्र विदेशों का रुख करते हैं। रूस, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, जॉर्जिया, फिलीपींस और अन्य देशों में भारतीय छात्र मेडिकल शिक्षा लेते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में मेडिकल शिक्षा लेना गलत नहीं है, लेकिन संस्थान का चयन पूरी जांच के बाद ही किया जाना चाहिए। केवल कम फीस या एजेंट के भरोसे लिया गया निर्णय छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने यह एडवाइजरी छात्रों को संभावित नुकसान से बचाने और यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी की है कि विदेश से प्राप्त मेडिकल डिग्री भारत में निर्धारित मानकों पर खरी उतर सके।
एजेंटों और भ्रामक दावों से बचें
काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि कोई भी एजेंट या संस्थान NEET (UG) उत्तीर्ण किए बिना विदेश या भारत में MBBS सीट की गारंटी नहीं दे सकता। कई एजेंट कम फीस या आसान एडमिशन का लालच देकर छात्रों को ऐसे मॉडल में भेजते हैं जहां पढ़ाई “टुकड़ों में” (भारत में कुछ साल, विदेश में कुछ साल) होती है। यह FMGL नियमों के खिलाफ है और डिग्री भारत में अमान्य मानी जा सकती है।

