पंजाब निकाय चुनाव 2026 : शहरों की राजनीति में चला ‘झाड़ू’, लेकिन कई जगह भाजपा और कांग्रेस ने भी दिखाई ताकत
चंडीगढ़, 29 मई | अटल हिन्द ब्यूरो
पंजाब के निकाय चुनाव परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि स्थानीय राजनीति में जनता विकास, भरोसे और सत्ता की स्थिरता को सबसे ज्यादा महत्व देती है। राज्य के आठ नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों के लिए हुए चुनावों में आम आदमी पार्टी ने सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए व्यापक जीत दर्ज की है। हालांकि कई शहरों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कर यह संकेत दे दिया कि पंजाब की राजनीति अब बहुकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रही है।
इन चुनावों में कुल 1977 वार्डों के लिए मतदान हुआ था। खास बात यह रही कि इस बार चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए। मतदान से पहले विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन मतगणना पूरी होने के बाद तस्वीर साफ हो गई कि शहरी मतदाता बड़े पैमाने पर आम आदमी पार्टी के साथ खड़े दिखाई दिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों में अक्सर सत्तारूढ़ दल को बढ़त मिलती रही है और इस बार भी वही परंपरा कायम रही। मतदाताओं ने स्थानीय विकास, फंड और प्रशासनिक समन्वय को ध्यान में रखते हुए सत्ता पक्ष को प्राथमिकता दी।
आठ नगर निगमों में आम आदमी पार्टी का दबदबा
पठानकोट, बरनाला, मोहाली, मोगा, बठिंडा, बटाला, अबोहर और कपूरथला नगर निगमों के परिणामों में आम आदमी पार्टी ने कई शहरों में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन कर राजनीतिक संतुलन बनाए रखा।
अबोहर : भाजपा की ऐतिहासिक जीत, ‘आप’ दूसरे स्थान पर
अबोहर नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए 50 में से 28 सीटों पर जीत दर्ज की। यह परिणाम भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंजाब के शहरी इलाकों में पार्टी लंबे समय बाद इतनी मजबूत स्थिति में दिखाई दी।
आम आदमी पार्टी को यहां 20 सीटों से संतोष करना पड़ा, जबकि कांग्रेस केवल एक सीट जीत सकी। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा। शिरोमणि अकाली दल खाता तक नहीं खोल पाया।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अबोहर का परिणाम यह संकेत देता है कि सीमावर्ती और व्यापारिक क्षेत्रों में भाजपा का प्रभाव अभी भी कायम है।
बरनाला : 50 में 36 सीटें जीतकर ‘आप’ ने दिखाया दम
बरनाला नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एकतरफा बढ़त हासिल करते हुए 50 में से 36 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा ने 7 सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि कांग्रेस को केवल 2 सीटें मिलीं। पांच वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
शिरोमणि अकाली दल यहां भी कोई प्रभाव नहीं छोड़ सका।
परिणाम घोषित होते ही शहर में आम आदमी पार्टी समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। ढोल-नगाड़े बजे, मिठाइयां बांटी गईं और कई जगह विजय रैलियां निकाली गईं।
यह जीत इस बात का संकेत मानी जा रही है कि पार्टी अब ग्रामीण ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पकड़ बना रही है।
बटाला : विकास के नाम पर जनता ने दिया समर्थन
बटाला नगर निगम में आम आदमी पार्टी ने 50 में से 30 सीटें जीतकर निगम पर मजबूत पकड़ बना ली। कांग्रेस 18 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही जबकि भाजपा को 2 सीटें मिलीं। अकाली दल यहां भी खाता नहीं खोल पाया।
मतगणना के दौरान सुबह से ही राजनीतिक माहौल बेहद गर्म रहा। बेरिंग यूनियन क्रिश्चियन कॉलेज स्थित मतगणना केंद्र के बाहर भारी भीड़ देखने को मिली।
जैसे-जैसे परिणाम आते गए, समर्थकों का उत्साह बढ़ता गया। विजयी प्रत्याशी ढोल की थाप पर नाचते दिखाई दिए, जबकि हारने वाले उम्मीदवारों के समर्थकों में निराशा साफ झलक रही थी।
जीत के बाद विधायक अमनशेर सिंह शैरी कलसी ने कहा कि जनता ने विकास कार्यों पर भरोसा जताया है और अब शहर में विकास की गति और तेज की जाएगी।
पठानकोट : भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी
पठानकोट नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। भाजपा ने 23 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 18 और आम आदमी पार्टी को 9 सीटें मिलीं।
यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पठानकोट लंबे समय से भाजपा का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है। सीमावर्ती और सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण इस शहर में भाजपा की पकड़ बरकरार रहना पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
चुनावी जीत के बाद हिंसा, महिला गंभीर घायल
निकाय चुनावों की खुशी के बीच तपा नगर काउंसिल से हिंसा की गंभीर घटना भी सामने आई। वार्ड नंबर 8 में चुनाव परिणाम आने के बाद कथित रूप से विजयी पक्ष के समर्थकों पर हंगामा करने और स्कॉर्पियो वाहन से एक महिला को कुचलने का आरोप लगा।
घायल महिला नाजिया, चुनाव हार चुके निर्दलीय उम्मीदवार नाजम हुसैन राजू खान की पत्नी बताई जा रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज रफ्तार वाहन भीड़ की ओर आया और महिला को टक्कर मारते हुए कुछ दूरी तक घसीटता ले गया।
महिला को गंभीर हालत में पहले तपा अस्पताल, फिर बरनाला और बाद में बठिंडा एम्स रेफर किया गया। परिवार ने इसे “जीत के बाद की गुंडागर्दी” करार देते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर आरोपित पक्ष ने सभी आरोपों से इनकार किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कपूरथला : कांग्रेस की जोरदार वापसी
कपूरथला नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 50 में से 31 सीटें जीत लीं। आम आदमी पार्टी को 10 सीटें मिलीं जबकि भाजपा और अकाली दल ने 3-3 सीटों पर जीत दर्ज की। तीन वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
मतगणना के दौरान कई वार्डों में बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिली। कुछ सीटों पर जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा।
कांग्रेस की इस जीत को पार्टी की शहरी क्षेत्रों में वापसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। मेयर पद पर भी अब कांग्रेस का दावा मजबूत माना जा रहा है।
मोगा : ‘आप’ की बड़ी बढ़त, नगर पंचायत में भी कब्जा
मोगा नगर निगम के 50 वार्डों में आम आदमी पार्टी ने 31 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त हासिल की। कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं जबकि भाजपा और अकाली दल को 3-3 सीटें प्राप्त हुईं। छह वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
कोट ई शेखा नगर पंचायत में भी आम आदमी पार्टी ने 13 में से 12 सीटें जीतकर लगभग पूरी पंचायत पर कब्जा जमा लिया।
परिणामों के बाद समर्थकों ने इसे “विकास और जनहित की राजनीति की जीत” बताया।
बठिंडा : पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ ‘आप’ का हाउस
बठिंडा नगर निगम चुनाव आम आदमी पार्टी के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। पहली बार पार्टी यहां पूर्ण बहुमत के साथ नगर निगम में अपना हाउस बनाने जा रही है।
परिणाम सामने आते ही शहर में जश्न का माहौल बन गया। समर्थकों ने मिठाइयां बांटी, आतिशबाजी की और रोड शो निकालकर जनता का आभार जताया। महिलाओं ने विजयी उम्मीदवारों का फूलमालाओं से स्वागत किया जबकि युवाओं ने डीजे की धुन पर नाचकर खुशी मनाई।
मोहाली : एक वोट से जीत ने बढ़ाया रोमांच
मोहाली नगर निगम चुनाव में कई वार्ड बेहद रोमांचक रहे। वार्ड नंबर 47 में आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार परमिंदर कौर ने मात्र एक वोट से जीत दर्ज कर चुनाव को यादगार बना दिया।
वार्ड नंबर 10 में निर्दलीय उम्मीदवार परमजीत सिंह काहलों ने कांग्रेस उम्मीदवार कंवरबीर सिंह सिद्धू को 131 वोटों से हराया। कंवरबीर सिंह सिद्धू पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के बेटे हैं।
भाजपा उम्मीदवार गुरप्रीत कौर ने वार्ड नंबर 41 में 35 वोटों से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस की बलजीत कौर ने वार्ड नंबर 37 से 882 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ दिखाई।
नगर पंचायत और नगर परिषदों में भी ‘आप’ सबसे आगे
नगर पंचायतों की 246 सीटों में आम आदमी पार्टी ने 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया। अकाली दल को 46, कांग्रेस को 26 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 48 सीटें मिलीं। बसपा को केवल एक सीट मिली जबकि भाजपा यहां कोई सीट नहीं जीत सकी।
वहीं नगर परिषदों की 1331 सीटों में से आम आदमी पार्टी ने 630 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को 263, अकाली दल को 100 और भाजपा को 97 सीटें मिलीं। 177 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि कुछ सीटों के परिणाम अभी बाकी हैं।
पंजाब की राजनीति को क्या संदेश?
इन चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की पकड़ अभी मजबूत बनी हुई है, खासकर शहरी क्षेत्रों में। हालांकि भाजपा ने अबोहर और पठानकोट जैसे क्षेत्रों में अपनी ताकत दिखाई है, जबकि कांग्रेस ने कपूरथला और कुछ अन्य इलाकों में वापसी के संकेत दिए हैं।
सबसे बड़ा झटका शिरोमणि अकाली दल को लगा है, जो कई प्रमुख नगर निगमों में खाता तक नहीं खोल पाया। यह परिणाम आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
पंजाब के मतदाताओं ने इस चुनाव में केवल नारों पर नहीं बल्कि स्थानीय विकास, प्रशासनिक पहुंच और राजनीतिक स्थिरता को प्राथमिकता दी है। अब देखना होगा कि जीत दर्ज करने वाली पार्टियां जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाती हैं।


