भारतीय ज्ञान परंपरा से समृद्ध होगी शिक्षा व्यवस्थाः प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा
शशि अरोड़ा /कुरुक्षेत्र / 05 अगस्त 2026 / अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद्गीता सदन के सीनेट हॉल में भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर कंटेंट डेवलपमेंट विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला भौतिकी विभाग तथा हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद, पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।
हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से शिक्षा व्यवस्था समृद्ध होगी और इसे प्रत्येक विषय की मुख्य पाठ्यचर्या में शामिल किया जाना चाहिए। कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में हुए इस कार्यक्रम में प्राचीन विश्वविद्यालयों और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर जोर दिया गया।
प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने नालंदा और तक्षशिला का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां 64 विषयों का अध्ययन कराया जाता था। यूजीसी ने पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए प्रारंभिक चरण में 28 विषयों का चयन किया है।
कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा समग्र एवं संतुलित शिक्षा की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि कुवि ने इस परंपरा को चार स्तरों पर लागू करने का प्रयास किया है, जिसमें वैल्यू एडेड पाठ्यक्रम और पूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम शामिल हैं।
कार्यशाला के दौरान कोऑर्डिनेटर प्रो. आरके मोदगिल, केन्द्रीय विश्वविद्यालय महेन्द्रगढ़ के उप-कुलपति प्रो. पवन शर्मा और सहायक कोऑर्डिनेटर डॉ. पीजूस कांति पाल ने भी अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश और गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करने के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।

