कलायत (कैथल) एनएच-152 पर स्वच्छता अभियान की खुली पोल
राष्ट्रीय राजमार्ग 152 (NH-152) पूरी तरह से हरियाणा राज्य में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग है, जो नरवाना को पंचकुला से जोड़ता है। इस हाईवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कैथल जिले के कलायत और कैथल शहर से होकर गुजरता है। यह मार्ग मुख्य रूप से अंबाला, कैथल, नरवाना और हिसार जैसे बड़े शहरों को आपस में जोड़ने के काम आता है।
कैथल /राजकुमार अग्रवाल /04 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी अफसरों को सफाई और बारिश में जलभराव रोकने के सख्त निर्देश देते रहते हैं। लेकिन ज़मीन पर कुछ लापरवाह अफसर सरकार के इन दावों पर पूरी तरह पानी फेर रहे हैं।
चंडीगढ़, हिसार और राजस्थान को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-152 (NH-152) आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। सड़क के दोनों तरफ कंटीली झाड़ियां उगी हैं, जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं और पानी निकासी के लिए बने साइफन महीनों से बंद पड़े हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि सफाई और मरम्मत का काम सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया है।
कलायत निवासी डॉ. राजिंदर छाबड़ा के अनुसार सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार हर साल हाईवे की सफाई, पेड़-पौधों की देखभाल और मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, तो यह पैसा आखिर जा कहां रहा है? अगर बजट खर्च हो चुका है तो ज़मीन पर काम क्यों नहीं दिख रहा, और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
एक तरफ जिला प्रशासन बाढ़ से निपटने के लिए आए दिन बैठकें कर रहा है और पानी की निकासी को पहली प्राथमिकता बता रहा है। वहीं दूसरी तरफ, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अफसर इसे बिल्कुल गंभीरता से नहीं ले रहे। जब नाले और साइफन कचरे से ही पटे रहेंगे, तो इन बैठकों का कोई मतलब नहीं रह जाता।
यह सिर्फ खूबसूरती की बात नहीं है, बल्कि लोगों की जान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। बारिश के मौसम में बंद नाले सड़क पर पानी भर देंगे, जिससे भयानक हादसे हो सकते हैं और सरकारी संपत्ति का भी नुकसान होगा। ऐसी लापरवाही जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
अगर कोई विभाग हर साल बजट लेता रहे और ज़मीन पर काम बिल्कुल न दिखे, तो इसे सिर्फ एक छोटी सी गलती कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जनता पूछना चाहती है कि क्या अफसरों की जांच सिर्फ फाइलों तक सीमित है?
हाईवे देश का चेहरा होते हैं। अगर वहीं पर गंदगी और बदहाली दिखेगी, तो यह सीधे तौर पर सरकार की साख पर सवाल खड़े करेगा।
अब सिर्फ बातें बनाने का वक्त खत्म हो चुका है, सख्त कार्रवाई की जरूरत है। जिन अफसरों की लापरवाही से यह हालत हुई है, उन्हें तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए। साथ ही, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि रखरखाव का पैसा कहां गायब हुआ।
आने वाले 15 अगस्त को जब पूरा देश आजादी का जश्न मनाएगा, तब क्या इस हाईवे पर कचरा और झाड़ियां ही दिखेंगी या फिर लापरवाह अफसरों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी?

