बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर अंकुश लगाने के लिए अभियान रहेगा जारी : डीसी
जिला प्रशासन की टीम ने समय रहते हस्तक्षेप कर रुकवाया बाल विवाह
सेक्टर-5 स्थित अशोक विहार क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना मिली
जांच के दौरान मौके पर पहुंची टीम को लड़कीड़ की आयु 17 वर्ष 2 माह मिली
परिजनों को कानून के प्रावधानों के बारे में जागरूक भी किया गया।
फतह सिंह उजाला
गुरुग्राम, 06 मार्च। डीसी अजय कुमार के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा जिले में बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत सेक्टर-5 स्थित अशोक विहार क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना मिलने पर प्रशासनिक टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक बाल विवाह को रुकवाने में सफलता हासिल की।
जानकारी के अनुसार 11 मार्च को निर्धारित एक विवाह के संबंध में प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जांच की। जांच के दौरान लड़की की आयु 17 वर्ष 2 माह पाई गई। आयु कम होने की पुष्टि होने के बाद टीम ने तुरंत हस्तक्षेप कर विवाह को रुकवा दिया। बाल विवाह निषेध अधिनियम के अनुसार विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना अनिवार्य है। संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी मधु जैन के नेतृत्व में गठित संयुक्त विभागीय टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए बाल विवाह को रुकवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही परिजनों को कानून के प्रावधानों के बारे में जागरूक भी किया गया।
बाल विवाह कानूनी अपराध
डीसी अजय कुमार ने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अन्तर्गत कानूनी अपराध है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लडक़ी व 21 वर्ष से कम आयु के लडक़े को नाबालिग माना जाता है। यदि कम आयु में विवाह किया जाता है तो यह संज्ञेय और गैर जमानती अपराध है, ऐसा कोई भी व्यक्ति जो बाल विवाह करवाता है, उसको बढ़ावा देता है या उसकी सहायता करता है, तो 2 साल तक की सजा और 1 लाख रूपये तक का जुर्माना हो सकता है।
लड़की 18 वर्ष और लड़का 21 वर्ष का हो
डीसी ने आमजन से आह्वान किया कि 18 वर्ष से कम आयु की लडक़ी व 21 वर्ष से कम आयु के लडक़े की बाल विवाह से सम्बन्धित कोई भी सूचना प्राप्त होती है तो वे बाल विवाह निषेध अधिकारी, पुलिस हेल्पलाइन 112, मैजिस्ट्रेट या चाइल्ड हेल्पलाइन नम्बर 1098 पर सम्पर्क कर सूचना दे सकते है, ताकि समय पर हस्तक्षेप करके नाबालिग के विवाह को रुकवाया जा सके।
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