राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 12.09 करोड़ रूपये की ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग ठगी का किया बड़ा खुलासा
मुंबई से फर्जी फाइनेंस कंपनी की महिला निदेशक को किया गिरफ्तार, कई राज्यों में फैले साइबर नेटवर्क की जांच तेज
जयपुर /21 जुलाई 2026 / अटल हिन्द डेस्क /दिनेश जांगिड़
राजस्थान पुलिस के साइबर क्राइम विंग ने ऑनलाइन निवेश के नाम पर 12 करोड़ 9 लाख 65 हजार 512 रुपये की साइबर ठगी के बहुचर्चित मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (GLLFL) की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को मुंबई से गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए उपयोग किए जा रहे वर्चुअल मर्चेंट खातों के संचालन में कंपनी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। प्रकरण में मुख्य आरोपी जयंता रॉय सहित अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री संजय अग्रवाल ने बताया कि स्टेट साइबर क्राइम पुलिस थाना जयपुर में 9 दिसंबर 2025 को दर्ज परिवाद में शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसे व्हाट्सएप के माध्यम से गोल्ड ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर www.kdeonegold.net नामक फर्जी वेबसाइट पर निवेश कराया गया और विभिन्न बैंक व वर्चुअल खातों में 12.09 करोड़ रुपये से अधिक जमा कराकर धोखाधड़ी की गई।
ऐसे दिया गया करोड़ों की ठगी को अंजाम
साइबर अपराधियों ने पहले व्हाट्सएप के जरिए संपर्क कर फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ते हुए अधिक लाभ का झांसा दिया। शुरुआत में वर्चुअल वॉलेट में काल्पनिक मुनाफा दिखाकर पीड़ित का विश्वास जीता गया और फिर लगातार अधिक निवेश करवाया गया। जब पीड़ित ने अपनी राशि निकालने का प्रयास किया तो आयकर, प्रोसेसिंग शुल्क, अकाउंट अनफ्रीज शुल्क तथा अन्य शुल्कों के नाम पर बार-बार अतिरिक्त रकम जमा करवाई गई। करोड़ों रुपये प्राप्त करने के बावजूद न तो निवेशित राशि लौटाई गई और न ही निकासी की अनुमति दी गई।
वित्तीय जांच में खुला बड़ा नेटवर्क
एडीजी साइबर क्राइम श्री सिंह के निर्देशन में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम ने तकनीकी एवं वित्तीय साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी में प्रयुक्त वर्चुअल मर्चेंट खाता प्राइम इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को उपलब्ध कराया गया था, जिसका संचालन गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (GLLFL) के माध्यम से किया जा रहा था।
जांच के दौरान ऑनबोर्डिंग, केवाईसी, ड्यू डिलिजेंस, रिस्क मॉनिटरिंग तथा फ्रॉड डिटेक्शन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। साथ ही संबंधित खातों के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (1930) पर देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होना भी पाया गया।
मुंबई से महिला निदेशक गिरफ्तार
प्रकरण में पूर्व में आरोपी इकबाल अहमद के विरुद्ध अनुसंधान पूर्ण कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया जा चुका है। आगे की जांच में GLLFL के निदेशकों की भूमिका प्रमाणित होने पर साइबर थाना जयपुर की टीम ने मुंबई पहुंचकर कंपनी की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को विधिवत गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपिया का पांच दिन का पुलिस रिमांड प्राप्त कर धन प्रवाह (मनी ट्रेल), फरार आरोपियों की भूमिका, डिजिटल साक्ष्यों तथा साइबर नेटवर्क के अन्य सदस्यों के संबंध में विस्तृत पूछताछ की जा रही है।
अन्य राज्यों के पीड़ितों की भी पहचान
राजस्थान पुलिस प्रकरण में प्रयुक्त बैंक खातों, मोबाइल नंबरों एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान में जुटी है। साथ ही राजस्थान सहित अन्य राज्यों में इस नेटवर्क से ठगी के शिकार हुए पीड़ितों की भी पहचान की जा रही है।
कार्रवाई करने वाली टीम
थानाधिकारी श्री गजेन्द्र शर्मा, उप अधीक्षक पुलिस के नेतृत्व में गठित टीम में अनुसंधान अधिकारी पुलिस निरीक्षक श्रीमती अमृता सिंह, उप निरीक्षक मुकेश कुमार तथा कांस्टेबल बोदूराम की विशेष भूमिका रही।
आमजन के लिए साइबर एडवाइजरी
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अधिक या गारंटीड रिटर्न का लालच देने वाले निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहें। केवल पंजीकृत एवं विश्वसनीय निवेश प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें। व्हाट्सएप, टेलीग्राम या अन्य सोशल मीडिया पर प्राप्त निवेश प्रस्तावों पर बिना सत्यापन भरोसा न करें तथा ओटीपी, यूपीआई, पिन गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

