कार्यकाल, विवाद और इस्तीफे को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद
महिला आयोग का कार्य न्याय सुनिश्चित करना है, सजा देना नहीं।”
चंडीगढ़ /09 जून /अटल हिन्द ब्यूरो
हरियाणा में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम: नर्सों के आंदोलन के आगे झुकीं महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया, दिया इस्तीफा
चंडीगढ़: हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। कुरुक्षेत्र के अस्पताल में हुए विवाद और उसके बाद राज्यभर की नर्सों द्वारा शुरू किए गए बड़े आंदोलन के दबाव में हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भेज दिया है।
हरियाणा महिला आयोग की पूर्व चेयरपर्सन रेणु भाटिया कार्यकाल, कार्यशैली और विवादों का पूरा सच
इस्तीफे में जताया मुख्यमंत्रियों का आभार
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भेजे पत्र में रेणु भाटिया ने लिखा:
“मैंने अपने पिछले लगभग साढ़े चार (4-1/2) वर्ष के कार्यकाल में अपनी निष्ठा और ईमानदारी से अध्यक्ष, हरियाणा राज्य महिला आयोग के पद पर कार्य किया है। इसके लिए मैं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और वर्तमान माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का आभार प्रकट करती हूं।”

उन्होंने आगे लिखा, “मैं आश्वस्त करती हूं कि मैं महिलाओं के अधिकारों एवं सम्मान की लड़ाई सदैव लड़ती रहूंगी। भविष्य में भी मुझे किसी पद पर नियुक्त किया जाएगा तो उसका निर्वाह पूरी निष्ठा से करूंगी। मैं वर्तमान में इस पद से इस्तीफा दे रही हूं, मेरा त्याग पत्र स्वीकार करने की कृपा करें।”
क्या था पूरा विवाद? (विवाद की जड़)
इस पूरे विवाद की शुरुआत कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) सिविल अस्पताल में एक लड़की के साथ हुए दुष्कर्म (रेप) मामले से हुई थी। इस शर्मनाक घटना का आरोपी अस्पताल का कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र कुमार शैली था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और स्वास्थ्य विभाग ने उसकी सेवाएं तुरंत समाप्त कर दीं।
अस्पताल के दौरे पर भड़की थीं रेणु भाटिया:
इसी मामले को लेकर 7 जून को महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया एलएनजेपी अस्पताल का दौरा करने पहुंची थीं। वहां उन्होंने प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर (PMO) डॉ. साराह अग्रवाल और ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ को मीडिया के सामने जमकर फटकार लगाई। भाटिया ने गुस्से में पूछा था:
“क्या आपकी भी बेटी है? क्या आप अपनी बेटी को 15 मिनट के लिए भी किसी कमरे में अकेला छोड़ सकती हैं? फिर इस बच्ची को अकेला कैसे छोड़ दिया गया?”
इसके साथ ही उन्होंने दागी डॉक्टर को दोबारा नौकरी पर रखे जाने को लेकर सीएमओ (CMO) डॉ. सुखबीर सिंह से भी तीखे सवाल पूछे थे कि आखिर किसकी सिफारिश पर इस डॉक्टर को दोबारा नियुक्त किया गया था।
नर्सों ने खोल दिया था मोर्चा, ठप कर दिया था काम
रेणु भाटिया द्वारा सार्वजनिक रूप से नर्सों को फटकार लगाने और उन पर आरोप मढ़ने के बाद हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन गुस्से में आ गया। राज्य के कई जिलों के सरकारी अस्पतालों में तैनात नर्सों ने एकजुट होकर ‘पेन डाउन स्ट्राइक’ (Pen Down Strike) शुरू कर दी और काम बंद कर दिया।
नर्सिंग एसोसिएशन ने अल्टीमेटम दिया था कि यदि महिला आयोग की चेयरपर्सन ने माफी नहीं मांगी या इस्तीफा नहीं दिया, तो गुरुवार को पूरे राज्य में पूर्ण हड़ताल (Full Day Strike) की जाएगी।
नर्सिंग स्टाफ का पक्ष:
प्रतिनिधि अनीता कश्यप ने कहा, “बिना तथ्यों और जांच के पूरे नर्सिंग समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाया गया। हमारे सम्मान को ठेस पहुंचाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
नर्सिंग सिस्टर ऑफिसर गुरमीत कौर ने दर्द बयां करते हुए कहा, “संबंधित वार्ड में हमारी ड्यूटी भी नहीं थी, हमारा इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं था। इसके बावजूद हमें सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ा किया गया, जिससे हम बेहद आहत हैं।”
नर्सों के इस चौतरफा विरोध और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे असर को देखते हुए आखिरकार रेणु भाटिया को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

