नई दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने दुनिया की पहली रोबोटिक सिस्टमिक लेफ्ट एट्रियोवेंट्रिकुलर वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की है
नई दिल्ली / 05 अगस्त 2026 / अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
भारत ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिससे पूरे देश का गौरव बढ़ा है। नई दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने दुनिया की पहली रोबोटिक सिस्टमिक लेफ्ट एट्रियोवेंट्रिकुलर वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की है। यह जटिल सर्जरी एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय विकार से पीड़ित वयस्क मरीज पर की गई है। इस सफलता ने साबित कर दिया है कि भारत अब आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का उपभोक्ता मात्र नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने वाला देश बन चुका है।
अत्यंत दुर्लभ और जटिल हृदय विकार की चुनौती
मानव हृदय में चार वाल्व होते हैं जो रक्त के प्रवाह को सही दिशा में रखते हैं। एट्रियोवेंट्रिकुलर या एवी वाल्व हृदय के ऊपरी और निचले कक्षों के बीच रक्त प्रवाह को नियंत्रित करता है। जब यह वाल्व क्षतिग्रस्त हो जाता है तो सांस फूलना, अत्यधिक थकान, दिल की धड़कन अनियमित होना और हृदय विफलता जैसी गंभीर समस्याएं होती हैं। इस मामले में मरीज को कंजेनियली करेक्टेड ट्रांसपोज़िशन ऑफ़ द ग्रेट आर्टरीज़ यानी ccTGA नामक दुर्लभ विकार था, जिसमें हृदय के निचले कक्षों की संरचना उलट जाती है। इसके साथ ही मरीज को डेक्स्ट्रोकार्डिया भी था, जिसमें हृदय छाती के दाहिने भाग में स्थित होता है, जिससे यह सर्जरी बेहद कठिन हो गई थी।
रोबोटिक तकनीक और थ्री डी इमेजिंग का सफल उपयोग
पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी में छाती की हड्डी को काटना पड़ता है जिससे अधिक रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा रहता है। इसके विपरीत, सफदरजंग अस्पताल की टीम ने कंप्यूटर आधारित थ्री डी इमेजिंग की सहायता से ऑपरेशन की पूर्व योजना बनाई। विशेष रूप से संशोधित रोबोटिक तकनीक का उपयोग करते हुए बाईं ओर से पहुंच बनाकर क्षतिग्रस्त वाल्व को हटाया गया और नया कृत्रिम वाल्व लगाया गया। यह विश्व का पहला प्रलेखित मामला है जिसमें इस जटिल संरचना वाले मरीज पर इस तकनीक का सफल प्रयोग किया गया। इस पूरी टीम का नेतृत्व प्रोफेसर डॉ. अनुभव गुप्ता ने किया, जबकि निदेशक डॉ. कविता शर्मा के मार्गदर्शन में यह संभव हुआ।
रोबोटिक सर्जरी के लाभ और भविष्य की दिशा
रोबोटिक कार्डियक सर्जरी के कई लाभ हैं क्योंकि इसमें छाती को पूरी तरह खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। छोटे चीरे लगने से दर्द, रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा कम होता है तथा मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। सफदरजंग अस्पताल की यह सफलता सरकारी चिकित्सा संस्थानों की वैश्विक मानकों पर कार्य करने की क्षमता को दर्शाती है। इस उपलब्धि से देश के मेडिकल छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक तकनीकों के साथ प्रशिक्षण पाने के नए अवसर मिलेंगे और स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

