खरीद बंद हुए बीता महीना, फिर भी आढ़तियों और मजदूरों का करोड़ो का भुगतान बकाया, सैनी राज में अन्नदाता और व्यापारी बेहाल : अनिरुद्ध चौधरी
तोशाम/09 जून/विष्णु दत्त शास्त्री
हरियाणा में भाजपा सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। भिवानी जिले की अनाज मंडियों में गेहूं की सरकारी खरीद बंद हुए पूरा एक महीना बीत चुका है, लेकिन सरकार की ढुलमुल नीति और प्रशासनिक लापरवाही के कारण आज भी आढ़ती और मंडी मजदूर पाई-पाई को मोहताज हैं।
इस गंभीर मुद्दे पर रोष प्रकट करते हुए कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ने राज्य की भाजपा सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पोर्टल और डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार ने मंडियों को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है।
अनिरुद्ध चौधरी ने बताया कि इस बार जिले में लगभग ढाई लाख मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड सरकारी खरीद हुई है, जो पिछले साल से करीब एक लाख मीट्रिक टन ज्यादा है। एक अप्रैल से शुरू हुई यह खरीद 15 मई को बंद हो गई थी और सारा गेहूं सरकारी गोदामों में पहुंचे भी 20 दिन से अधिक का समय हो चुका है।
जब सारा अनाज गोदामों में सुरक्षित पहुंच गया, रिकॉर्ड तोड़ उठान हो गया, तो फिर भुगतान रोकने का क्या औचित्य है। सरकार आढ़तियों और मजदूरों के पेट पर लात क्यों मार रही है।
उन्होंने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि नियमों के मुताबिक आढ़तियों को लगभग 50 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से आढ़त (कमिशन) राशि मिलती है। इस लिहाज से जिले भर के मंडी आढ़तियों की 12 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि सरकार दबाकर बैठी है।
चौधरी ने कहा कि सरकारी एजेंसियों ने गेहूं तो ले लिया, लेकिन आढ़तियों के खातों में कमीशन डालने की प्रक्रिया तक शुरू नहीं की गई। आढ़ती लंबे समय से अपने बैंक खातों को देख रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। इस आर्थिक तंगी के कारण व्यापारियों को अपनी जेब से या कर्ज लेकर मंडियों का कामकाज संभालना पड़ रहा है, जिससे मंडियों में पूरी तरह से आर्थिक संकट और नाराजगी का माहौल है।
सबसे संवेदनशील मुद्दा उठाते हुए अनिरुद्ध चौधरी ने कहा कि जो मजदूर कडक़ड़ाती धूप में अनाज की सफाई, तुलाई और भराई करते हैं, सरकार ने उन्हें भी नहीं बख्शा। 18 अप्रैल तक जिले में हुए लगभग साढ़े 18 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद की मजदूरी आज तक जारी नहीं की गई है।
जिले के मजदूरों की 2 करोड़ 30 लाख रुपये की मजदूरी अटकी हुई है। हालांकि आढ़तियों ने अपनी साख बचाने के लिए मजदूरों को अपनी जेब से भुगतान कर दिया है, लेकिन सरकार की तरफ से आढ़तियों को यह बकाया राशि जारी नहीं होना सीधे तौर पर प्रदेश सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है।
अनिरुद्ध चौधरी ने तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने शुरुआत में किसानों को भुगतान का भरोसा देकर आढ़ती-किसान-मजदूर के सदियों पुराने त्रिकोण को तोडऩे की कोशिश की। लेकिन सच यह है कि आज किसान भी परेशान है, आढ़ती भी कर्जदार हो रहा है और मजदूर भी बेहाल है।
उन्होंने अनाज मंडी के अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि जल्द राशि जारी होगी, लेकिन उम्मीदों से घर का चूल्हा नहीं जलता। कांग्रेस पार्टी इस लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर आगामी कुछ दिनों के भीतर आढ़तियों की 12 करोड़ की कमीशन राशि और मजदूरों का 2.30 करोड़ का बकाया तुरंत खातों में नहीं डाला गया, तो कांग्रेस पार्टी आढ़तियों और मजदूरों को साथ लेकर भिवानी की सडक़ों पर उतरने और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी।
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