जटौली कॉलेज की इसके आरंभिक नाम “कमला नेहरू” के कारण उपेक्षा तो नहीं-पर्लचौधरी
सीएम नायाब सैनी जितनी आपकी उम्र, उतना ही पुराना गवर्नमेंट जटौली कॉलेज
ज्ञान-स्वास्थ्य के वातावरण के विपरीत, बीमारी, बदबू और अव्यवस्था का माहौल
जिला गुरुग्राम का सबसे पुराना को-एजुकेशन का शिक्षण संस्थान गवर्नमेंट कॉलेज जटौली
लगभग 90 प्रतिशत परिसर में सीवेज और बदबूदार पानी के कारण हुआ बदहाल
अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स /जटौली-गुरुग्राम /0 2 अगस्त /फतह सिंह उजाला
गुरुग्राम जिले का पहला और सबसे पुराना सहशिक्षा (को-एड) गवर्नमेंट कॉलेज, गवर्नमेंट कॉलेज जटौली हेलीमंडी, अपनी स्थापना के इतिहास के कारण विशेष महत्व रखता है। इसकी आधारशिला 20 सितंबर 1970 को तत्कालीन कांग्रेस पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री चौ बंसीलाल ने कमला नेहरू महाविद्यालय, जटौली हेलीमंडी के नाम से रखी थी।
संयोग से यह वही वर्ष है, जिसमें आपका जन्म हुआ था। दुर्भाग्य यह है कि आज यह ऐतिहासिक महाविद्यालय जिसने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षित एवं जिम्मेदार नागरिक बनाकर अपनी जिम्मेदारी निभाई, अपने लगभग 90 प्रतिशत परिसर में सीवेज के गंदे और बदबूदार पानी के जलभराव के कारण बदहाल स्थिति में है।
जहाँ ज्ञान-स्वास्थ्य का वातावरण होना चाहिए, वहाँ बीमारी, बदबू और अव्यवस्था का माहौल है। कहीं इसका आरंभिक नाम कमला नेहरू उपेक्षा का कारण तो नहीं ? यह तीखा सवाल हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट पार्लर चौधरी के द्वारा गवर्नमेंट कॉलेज जटौली की बदहाली पर व्यक्त की गई है।
कांग्रेस नेत्री श्रीमती चौधरी ने कहा जाटोली गाँव सहित पूरे क्षेत्र के लोगों ने वर्षों से इस समस्या की शिकायत प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और सांसदों तक की है। इस संबंध में आवेदन आपके कार्यालय तक भी पहुँचे होंगे।
लेकिन वो आवेदन आज भी फाइलों में दबे कराह रहे है मुख्यमंत्री महोदय, नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। विनम्र आग्रह है कि 15 अगस्त 2026 से पहले इस कॉलेज की स्थिति सुधारने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें।
यदि ऐसा नहीं होता, तो अपने भविष्य के लिए पढ़ रहे छात्र लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण संघर्ष करने को विवश होंगे, और इस जनहित के संघर्ष में उनके साथ खड़ी रहूँगी।
यहाँ के पूर्ववर्ती छात्र भी कॉलेज का कर्ज चुकाने के लिए इस मुहिम में भागीदारी देंगे। सोशल मीडिया ( ट्विटर, एक्स) के माध्यम से प्रतिदिन आपको इस मुद्दे की याद दिलाऊँगी, ताकि शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या पर जागे और कार्रवाई करे।

जलभराव के बीच भांग के पौधे लहलहा रहे
मुख्यमंत्री जी, आपने “नशे के विरुद्ध एक युद्ध” अभियान चलाया है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस परिसर में शिक्षा की पौध लहलहानी चाहिए, वहाँ जलभराव के बीच भांग के पौधे लहलहा रहे हैं।
यह किसी भी सरकार और शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। क्या आपकी सरकार ने इस महाविद्यालय के रखरखाव के लिए किसी एजेंसी को टेंडर दे रखा है? अगर ऐसा है तो उस एजेंसी को किस काम के लिए भुगतान किया जा रहा है उसकी जांच की जानी चाहिए।
एसटीपी के गंदे पानी को तत्काल निकाला जाए
गवर्नमेंट कॉलेज जटौली परिसर में फैले एसटीपी के गंदे पानी को तत्काल पूरी तरह हटाया जाए। गंदे पानी से नष्ट हुए पेड़ों का पुनरोद्धार किया जाए तथा परिसर में उगी भांग एवं अन्य अवांछित वनस्पतियों को तत्काल हटाया जाए।
कॉलेज के बगल में स्थित एसटीपी को चरणबद्ध योजना के तहत स्थानांतरित किया जाए तथा भविष्य में उसका एक बूंद पानी भी कॉलेज परिसर में प्रवेश न करे। गंदे जलभराव और प्रशासनिक उपेक्षा से जर्जर हुए कॉमर्स ब्लॉक सहित सभी भवनों की मरम्मत एवं रखरखाव की समयबद्ध योजना घोषित की जाए।
विद्यार्थियों एवं स्टाफ, खासकर छात्राओं एवं महिला स्टाफ के लिए पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था की जाए। नई इमारत के स्टाफ टॉयलेट में दरवाजे गायब हैं, तत्काल दरवाजे और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।

विद्यार्थियों के भविष्य,स्वास्थ्य और शिक्षा का सवाल
कांग्रेस महिला अध्यक्ष श्रीमती चौधरी ने कहा इसी कॉलेज केंपस में स्थापित विद्या की देवी माँ सरस्वती की प्रतिमा भी जलभराव का स्तर बढ़ने पर सीवेज के पानी से घिर जाती है, इसे सुरक्षित रखने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। कॉलेज में शिक्षकों एवं सहायक कर्मचारियों के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती कर शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
इस कॉलेज के सरकारी वेबपेज gcjhm.ac.in पर स्थापना वर्ष 1980 लिखा है, जबकि शिक्षा विभाग के वेबपेज पर 1970, इसमें भी एकरूपता लाया जाए। ऐसी छोटी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण गलतियां सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की पोल खोल कर रख देती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री सीएम सैनी का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा यह केवल एक कॉलेज का नहीं, बल्कि पटौदी विधानसभा एवं आसपास के क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य, उनके स्वास्थ्य और उनकी शिक्षा का प्रश्न है। इस ऐतिहासिक जटौली मंडी राजकीय महाविद्यालय को उसकी गरिमा लौटाने के लिए शीघ्र और प्रभावी कदम उठाएगी।
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