वेंकेट गर्ग का मामला यह दिखाता है कि कैसे स्थानीय स्तर से शुरू हुआ अपराध धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंच सकता है।
अम्बाला / 11 जून 2026 / अटल हिन्द ब्यूरो / पूर्ण सिंह
जॉर्जिया से प्रत्यर्पित गैंगस्टर वेंकेट गर्ग: 53 सदस्यीय नेटवर्क का सरगना, हत्या–रंगदारी के 30 मामलों में नामजद, STF की बड़ी कामयाबी
हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल करते हुए कुख्यात गैंगस्टर वेंकेट गर्ग को जॉर्जिया से प्रत्यर्पित कर दिल्ली लाने के बाद हिरासत में ले लिया है। आरोपी पर हत्या, टारगेट किलिंग, रंगदारी और जानलेवा हमले सहित कुल 30 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
यह भारत और जॉर्जिया के बीच पहला सफल प्रत्यर्पण मामला माना जा रहा है, जिसने देश की जांच एजेंसियों की अंतरराष्ट्रीय पकड़ को और मजबूत किया है।
नारायणगढ़ से अपराध की दुनिया तक का सफर
वेंकेट गर्ग मूल रूप से हरियाणा के अंबाला जिले के नारायणगढ़ क्षेत्र की चंदना कॉलोनी (वार्ड नंबर 4) का रहने वाला है। स्थानीय स्तर पर वह एक साधारण परिवार से जुड़ा बताया जाता है, लेकिन समय के साथ उसका नाम अपराध की दुनिया में तेजी से उभरने लगा।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शुरुआती दौर में उसके खिलाफ छोटे आपराधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें विवाद, धमकी और स्थानीय स्तर पर वर्चस्व की लड़ाई शामिल थी। धीरे-धीरे उसने अपने आसपास युवकों का एक समूह तैयार किया और एक संगठित आपराधिक गिरोह की नींव रखी।
गैंग का विस्तार और 53 सदस्यीय नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, वेंकेट गर्ग ने अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, पंचकूला और चंडीगढ़ तक फैले करीब 53 सदस्यों के गैंग का संचालन किया। यह गिरोह मुख्य रूप से रंगदारी, फायरिंग, डराने-धमकाने और टारगेट किलिंग जैसी गतिविधियों में सक्रिय था।
नारायणगढ़ में बसपा नेता हरबिलास की हत्या और अंबाला–यमुनानगर में व्यापारियों पर रंगदारी के लिए की गई फायरिंग की घटनाओं में इसी गैंग की संलिप्तता सामने आई थी।
विदेश भागने की पूरी साजिश
STF जांच के अनुसार, वेंकेट गर्ग 10 दिसंबर 2024 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से फर्जी पासपोर्ट के जरिए संयुक्त अरब अमीरात भाग गया था।
इसके बाद वह 26 जनवरी 2025 को जॉर्जिया पहुंच गया और वहीं से अपने नेटवर्क को संचालित करता रहा।
गंभीर बात यह रही कि विदेश में रहते हुए भी उसने अपने भारत स्थित गुर्गों के जरिए रंगदारी और फायरिंग की घटनाएं जारी रखीं, जिसके चलते उसके खिलाफ और 10 नए मामले दर्ज किए गए।
फर्जी पासपोर्ट और पहचान छिपाने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया कि वेंकेट गर्ग ने गुरुग्राम के सेक्टर-67 स्थित “पिरामिड अर्बन होम्स” का फर्जी पता देकर पासपोर्ट हासिल किया था।
नारायणगढ़ थाने में इस धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बाद एसटीएफ की सिफारिश पर 4 फरवरी 2025 को उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था।
इसके बाद उसके खिलाफ 6 ओपन-डेटेड गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए और इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हुआ।
जॉर्जिया से भारत तक प्रत्यर्पण ऑपरेशन
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर जॉर्जिया में उसकी लोकेशन ट्रेस की गई। इसके बाद हरियाणा STF और केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त रूप से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू की।
गुरुवार को उसे जॉर्जिया से भारत लाकर दिल्ली लाया गया, जहां तुरंत STF ने उसे हिरासत में ले लिया।
अपराध की ओर बढ़ने के कारण: सामाजिक और आपराधिक संकेत
पुलिस और जांच अधिकारियों के अनुसार, वेंकेट गर्ग के अपराध की ओर बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आते हैं—
स्थानीय स्तर पर गैंग वर्चस्व की लड़ाई
तेजी से पैसा और सामाजिक दबदबा बनाने की प्रवृत्ति
आपराधिक नेटवर्क के संपर्क में आना
शुरुआती मामलों में सख्त कानूनी रोकथाम की कमी
हालांकि अधिकारियों का यह भी कहना है कि वह पूरी तरह एक संगठित आपराधिक मानसिकता में बदल चुका था और धीरे-धीरे उसने अपराध को ही अपना “मुख्य व्यवसाय” बना लिया।
पुलिस और STF की भूमिका
हरियाणा STF ने इस मामले में लंबी निगरानी, तकनीकी सर्विलांस और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय के जरिए कार्रवाई को अंजाम दिया।
इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया
विदेश भागने के बाद लगातार ट्रैकिंग जारी रही
पासपोर्ट रद्द और कानूनी शिकंजा मजबूत किया गया
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से प्रत्यर्पण संभव हुआ
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ा संदेश है कि अब अपराधी विदेश में भी सुरक्षित नहीं रह सकते।
गैंगस्टर नेटवर्क पर बड़ा असर
वेंकेट गर्ग की गिरफ्तारी से हरियाणा और आसपास के राज्यों में सक्रिय उसके 53 सदस्यीय नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। पुलिस अब उसके सहयोगियों और फंडिंग नेटवर्क की जांच में जुट गई है।
वेंकेट गर्ग का मामला यह दिखाता है कि कैसे स्थानीय स्तर से शुरू हुआ अपराध धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंच सकता है। वहीं, यह प्रत्यर्पण ऑपरेशन भारतीय जांच एजेंसियों की बढ़ती वैश्विक क्षमता और समन्वय का भी प्रमाण है।
STF की यह कार्रवाई आने वाले समय में संगठित अपराध और गैंग नेटवर्क के खिलाफ एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।


