नरेंद्र मोदी की तानाशाह की सरकार ने 20 जुलाई 2026 को क्रूरता की सारी हदें पार कर दी है।
नई दिल्ली /21 जुलाई 2026 /अटल हिन्द /राजकुमार अग्रवाल
दिल्ली में पिछले दो दिन से छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन चल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के नेतृत्व में लोग NEET और दूसरी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के खिलाफ सड़क पर उतरे थे। 20 और 21 जुलाई को जंतर-मंतर पर काफी भीड़ जमा हुई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ झड़पें भी हुईं। लाठियां चलीं, आंसू गैस छोड़ा गया और कई युवा घायल हो गए।
20 जुलाई को CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी संसद की तरफ बढ़ने लगे तो पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगा दिए। वहां धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ लोगों ने पत्थर भी फेंके। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने पहले हमला किया, सरकारी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया और करीब 118 पुलिस वाले घायल हुए। वहीं प्रदर्शन करने वाले कह रहे हैं कि पुलिस ने बहुत ज्यादा बल प्रयोग किया। छात्र-छात्राओं पर, लड़कियों पर भी लाठियां पड़ीं।
अगले दिन 21 जुलाई को फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ। पुलिस ने रात में मंच और तंबू हटा दिए थे, फिर भी सुबह से लोग आते रहे। शाम तक हजारों की संख्या हो गई। प्रदर्शनकारियों ने दोबारा मंच बना लिया और नारे लगाने शुरू कर दिए। “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो”, “पुलिस अत्याचार बंद करो” जैसे नारे गूंजते रहे। CJP के नेता अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन और आगे बढ़ेगा।
महाराष्ट्र से आई एक महिला अश्विनी भिवबड़े वहां थीं। उन्होंने बताया, “कल हम जंतर-मंतर पर खड़े थे। अचानक पुलिस ने लाठियां चलानी शुरू कर दीं। मेरे पति दिलीप को भी चोट लगी। वे धरने की तरफ जा रहे थे।” अश्विनी ने कहा कि सरकार का यह तरीका अंग्रेजों से भी बदतर है।
एक और महिला क्रांति ने कहा कि उनके साथ छोटे बच्चे भी थे। पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज कर दिया। धक्का-मुक्की में बच्चे गिर पड़े। उन्होंने कहा, “हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे। सरकार सुनने को तैयार ही नहीं है।”
महाराष्ट्र के जयकांत ने बताया, “छात्र सिर्फ पेपर लीक का मुद्दा उठा रहे हैं। वे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा चाहते हैं। सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्रदर्शन जारी रहेगा। छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।”
कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वालों को फूल देकर अपना विरोध जताया। वे कह रहे थे कि कल लाठियां मारीं, आज फूल ले लीजिए। ज्यादातर पुलिस वाले फूल लेने से बचते रहे, लेकिन एक-दो ने ले भी लिया।
जंतर-मंतर पर CJP के वॉलंटियर खुद आईडी चेक कर रहे थे। मीडिया वाले और आम लोग, सबकी जांच हो रही थी। कई लोगों को अंदर नहीं जाने दिया गया।
विपक्षी पार्टियां भी इस मुद्दे पर सक्रिय हुईं। कांग्रेस के राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन करने गए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में छोड़ दिया। राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार हो रहा है और छात्रों पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से माफी मांगी।
संसद के मानसून सत्र में भी विपक्ष ने सरकार के खिलाफ काफी हंगामा किया। समाजवादी पार्टी समेत दूसरे विपक्षी दल भी इस प्रदर्शन के साथ खड़े नजर आए। उत्तराखंड के कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत और दिल्ली कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन ने जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन सरकार डर गई है और उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
पेपर लीक का मुद्दा नया नहीं है। पिछले कुछ सालों से NEET, NET और दूसरी परीक्षाओं में बार-बार अनियमितताओं की खबरें आ रही हैं। छात्र कहते हैं कि उनके सालों की मेहनत एक रात में बर्बाद हो जाती है जब पेपर लीक हो जाता है। कई जगहों पर पैसे लेकर पेपर बेचने के आरोप भी लगे हैं। सरकार की तरफ से जांच कमेटी बनाई जाती है, लेकिन आम छात्रों को लगता है कि असली दोषियों तक पहुंच ही नहीं हो पाती।
CJP के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता आशुतोष राणा और प्रवक्ता सौरव दास भी प्रदर्शन में सक्रिय रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
जंतर-मंतर पर माहौल काफी तनाव भरा था। एक तरफ पुलिस की भारी तैनाती, बैरिकेडिंग और तलाशी, दूसरी तरफ छात्रों का गुस्सा और हताशा। कई युवा वहां रात भर रुके रहे। कुछ लोग पानी की बोतलें और खाने का सामान लेकर आए थे।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम पढ़ाई करके अच्छा भविष्य बनाना चाहते हैं। लेकिन हर साल पेपर लीक हो जाता है। फिर पुलिस हमें पीटती है। सरकार को सोचना चाहिए कि युवा किस स्थिति में हैं।”
पुलिस की तरफ से कहा गया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए। लेकिन प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बल प्रयोग जरूरत से ज्यादा था। कुछ वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए जिसमें लाठीचार्ज के दृश्य दिख रहे थे।
इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश भर के छात्र इस प्रदर्शन को देख रहे हैं। कई जगहों पर छोटे-छोटे प्रदर्शन भी हुए हैं। लोग कह रहे हैं कि अगर जल्दी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
अभिजीत दीपके ने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली का मुद्दा नहीं है। पूरे देश के युवा इससे जुड़े हैं। वे चाहते हैं कि परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से हो और जो गलती करते हैं उन्हें सजा मिले।
दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से लोग जंतर-मंतर पहुंचे। कुछ ट्रेन से आए, कुछ बस से। महाराष्ट्र, उत्तराखंड, बिहार समेत कई राज्यों से छात्र आए थे। ज्यादातर 18 से 25 साल के बीच के युवा थे।
दिल्ली में CJP छात्र आंदोलन-लोकतंत्र, नागरिक अधिकार और सुरक्षा बलों की भूमिका पर उठते सवाल
एक युवा ने बताया, “मैं NEET की तैयारी कर रहा था। पेपर लीक होने के बाद मेरा मन टूट गया। अब लगता है कि मेहनत का कोई फायदा नहीं।”
सरकार की तरफ से अभी तक कोई बड़ा बयान नहीं आया है। शिक्षा मंत्रालय ने पहले कहा था कि जांच चल रही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों को उस पर भरोसा नहीं है।
जंतर-मंतर पर कुछ लोग पुलिसकर्मियों से बात भी कर रहे थे। एक ने कहा, “आप भी तो हमारे जैसे ही हैं। लेकिन आज आपको हम पर लाठी चलानी पड़ रही है।” पुलिस वाले ज्यादातर चुप रहे।
इस प्रदर्शन से दिल्ली ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ। कई रास्ते बंद रहे। लोग परेशान हुए। लेकिन छात्र कहते हैं कि उनकी आवाज उठाने के लिए यह जरूरी था।
अब देखना है कि आगे क्या होता है। क्या सरकार कोई ठोस कदम उठाती है या प्रदर्शन और बढ़ता जाएगा। छात्रों की मांग साफ है – पेपर लीक रुकना चाहिए, दोषियों पर कार्रवाई हो और शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें।
प्रदर्शन स्थल से सीधी आवाजें: “बिना चेतावनी शुरू हुआ लाठीचार्ज”
जंतर-मंतर पर मौजूद कई प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को हुई घटना का अपना अनुभव साझा किया:
अश्विनी भिवबड़े (सामाजिक कार्यकर्ता, महाराष्ट्र):
“हम कल शांति से खड़े थे कि अचानक लाठीचार्ज शुरू हो गया। मेरे पति दिलीप भिवगड़े को भी लाठियां लगीं और वे घायल हो गए। सरकार का यह रवैया लोकतांत्रिक नहीं है।”
क्रांति (प्रदर्शनकारी):
“हमारे साथ कुछ छोटे बच्चे भी थे। पुलिस की ओर से अचानक हुई धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज में कई बच्चे गिर गए और उन्हें चोटें आईं। छात्र केवल पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं, जो उनका हक है।”
जयकांत (छात्र, महाराष्ट्र):
“पेपर लीक के कारण लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका है। जब तक नीट और अन्य परीक्षाओं की अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय नहीं होती और शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, हमारा विरोध जारी रहेगा।”
विरोध का अनोखा तरीका: पुलिस को दिए गुलाब
मंगलवार को कुछ प्रदर्शनकारी अलग अंदाज में विरोध दर्ज कराते दिखे। वे सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को गुलाब का फूल थमा रहे थे और कह रहे थे— “कल की लाठियों के बदले आज फूल ले लीजिए।” हालांकि, अधिकांश पुलिसकर्मी फूल लेने से हिचकिचाते नजर आए, लेकिन कुछ ने फूल स्वीकार कर लिए।

