कैथल में ‘रिश्वत का रेट कार्ड’ जारी करने वाले वेटरनरी डॉक्टर का अनोखा कारनामा, गिरफ्तारी के बाद भी नहीं उतरा रौब
कैथल /02 अगस्त 2026/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
हरियाणा के कैथल जिले में भ्रष्टाचार का एक बेहद हैरान करने वाला और चर्चा का विषय बना मामला सामने आया है। पट्टी अफगान में तैनात सरकारी वेटरनरी सर्जन डॉक्टर अंकुर शर्मा ने अपनी कुर्सी को कमाई का जरिया बनाते हुए बकायदा रिश्वत का ‘रेट कार्ड’ तय कर रखा था। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने कार्रवाई करते हुए डॉक्टर को 28,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद डॉक्टर का जो ‘स्वैग’ और एटीट्यूड देखने को मिला, उसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला कैथल के प्रताप गेट पर डेयरी चलाने वाले किसान राममेहर (गांव सेंगरी/सोंगरी निवासी) से जुड़ा है। राममेहर को अपनी भैंसों पर बैंक से लोन लेना था, जिसके लिए उन्हें वेटरनरी हेल्थ सर्टिफिकेट की सख्त जरूरत थी।
जब वे डॉक्टर अंकुर शर्मा के पास पहुंचे, तो डॉक्टर ने बिना किसी संकोच के अपना फिक्स रेट बता दिया— प्रति भैंस 3,000 रुपये। इस हिसाब से कुल 30,000 रुपये की डिमांड की गई।
लगातार उत्पीड़न: किसान के पास तुरंत पैसे न होने पर डॉक्टर ने सर्टिफिकेट पर तो हस्ताक्षर कर दिए, लेकिन इसके बाद उन्होंने मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी।
पीछा करना: डॉक्टर साहब ने दिनभर में 10-12 फोन करने और खुद डेयरी पर पहुंच-पहुंचकर पैसों के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया।
फिल्मी अंदाज में हुआ ट्रैप और गिरफ्तारी
लगातार हो रही प्रताड़ना से तंग आकर किसान राममेहर ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। योजना के तहत ACB की टीम ने जाल बिछाया।
कार में चल रहा था खेल: गुरुवार को विश्वकर्मा चौक के पास डॉक्टर अंकुर अपनी निजी कार में BlaBlaCar ऐप के जरिए चंडीगढ़ जाने वाली तीन सवारियां बैठाकर ले जा रहे थे।
रंगेहाथ दबोचा: जैसे ही डॉक्टर ने रिश्वत की रकम हाथ में ली, ACB इंस्पेक्टर सूबे सिंह की टीम ने उन्हें घेर लिया। टीम को देखते ही डॉक्टर ने भागने की कोशिश की, लेकिन चौकसी के चलते उनकी कोशिश नाकामयाब रही।
गिरफ्तारी के बाद भी नहीं गया ‘एटीट्यूड’
इस पूरी कार्रवाई का सबसे चर्चित पहलू डॉक्टर अंकुर शर्मा का गिरफ्तारी के बाद का रवैया रहा। पुलिस गिरफ्त में होने के बावजूद उनका रसूख और स्टाइल कम नहीं हुआ:
आराम से बैठे रहे: पूछताछ के दौरान वे पैर पर पैर चढ़ाकर कुर्सी पर ऐसे बैठे रहे मानो कोई बड़े अधिकारी हों।
मीडिया के सामने पोज: मीडिया के कैमरों के सामने उन्होंने बेपरवाही से हाथ पीछे बांधकर पोज दिए।
चेहरा ढकने से इनकार: जब ACB इंस्पेक्टर ने उनका चेहरा छिपाने के लिए रुमाल आगे बढ़ाया, तो डॉक्टर ने हाथ से इशारा कर साफ इनकार कर दिया कि “इसकी कोई जरूरत नहीं है।”
पुलिस को ही निर्देश: यहां तक कि जब उन्हें ACB की गाड़ी में बैठाया जा रहा था, तब भी वे जांच टीम को ही निर्देश देते हुए नजर आए।
अन्य मामलों की भी हो रही है जांच
ACB अब इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि क्या डॉक्टर अंकुर शर्मा इससे पहले स्थानीय डेयरी संचालकों और दूध विक्रेताओं पर खुद को फूड सेफ्टी अधिकारी बताकर डराते-धमकाते थे और अवैध वसूली करते थे।
फिलहाल, मुख्य शिकायत भैंसों के हेल्थ सर्टिफिकेट के नाम पर रिश्वत वसूलने की थी। डॉक्टर को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। एसीबी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं और पीड़ितों की तलाश में जुट गई है, ताकि इस ‘रेट कार्ड’ सिंडिकेट की पूरी परतें खोली जा सकें।

