कांवड़ यात्रा या अराजकता? मुजफ्फरनगर और हाइवे पर वायरल वीडियो ने उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली / 02 अगस्त 2026/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
सड़कों पर तमाशा, कानून की धज्जियां और बेलगाम होती भीड़: कांवड़ यात्रा के नाम पर बढ़ता अराजकता का ग्राफ
हाल ही में सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो ने देश की व्यवस्था, प्रशासनिक मुस्तैदी और सार्वजनिक अनुशासन पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित मीनाक्षी चौक और आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) से सामने आए ये वीडियो किसी भी सभ्य और कानून-पसंद समाज की रीढ़ में सिहरन पैदा करने के लिए काफी हैं।
एक तरफ जहां धार्मिक आस्था और पवित्र अनुष्ठानों की आड़ में सड़कों पर खुलेआम मनमानी और उत्पात मचाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता, वाहन चालकों और यातायात व्यवस्था का दम घुटता नजर आ रहा है।
क्या सड़कों पर कब्जे का लाइसेंस मिल गया है?
वायरल फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कैसे कांवड़ यात्रा के नाम पर नेशनल हाईवे और शहर की मुख्य सड़कों को पूरी तरह से हाईजैक कर लिया गया है।
सड़कों के बीचों-बीच डीजे की तेज धुन पर हुड़दंग मचाना, वाहनों के ऊपर चढ़कर तोड़फोड़ करना, राह चलते आम नागरिकों और ट्रक ड्राइवरों के साथ मारपीट या जबर्दस्ती करना अब एक आम बात बन गई है। सवाल यह उठता है कि क्या आस्था के नाम पर देश के संविधान, कानून और आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों को ताक पर रखने की छूट दी जा सकती है?
वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कुछ युवक और खुद को कांवड़िया कहने वाले उपद्रवी किस प्रकार कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं। एक दृश्य में एक ट्रक को घेरकर उसमें तोड़फोड़ की कोशिश की जा रही है, तो दूसरे दृश्यों में हाइवे पर यातायात को बाधित कर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग में बढ़ती अनुशासनहीनता का भी जीता-जाता प्रमाण है।

दोहरे मापदंड और प्रशासनिक चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की न्याय व्यवस्था और दोहरे मापदंडों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब छात्र या युवा जंतर-मंतर या अन्य जगहों पर अपनी शिक्षा, रोजगार या लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से कोई प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें फौरन ‘अराजक’ और ‘देशविरोधी’ करार दे दिया जाता है। उन पर देशद्रोह और भारी भरकम धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जाते हैं, पुलिस के लाठीचार्ज का सामना करना पड़ता है और उनकी आवाज़ को कुचल दिया जाता है।
लेकिन इसके विपरीत, जब धार्मिक यात्राओं या आयोजनों की आड़ में खुलेआम सड़कों पर तांडव मचाया जाता है, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जाता है और आम जनता को प्रताड़ित किया जाता है, तब प्रशासन और सत्ता में बैठे लोग चुप्पी साध लेते हैं। क्या आस्था के आवरण में ढंके ये कृत्य अपराध की श्रेणी में नहीं आते? क्या कानून की नजर में सभी नागरिक समान नहीं हैं? यह देश के हर उस जागरूक नागरिक के मन में सुलग रहा सवाल है जो व्यवस्था से जवाब मांगता है।
अनुशासन और संस्कृति के नाम पर ढोंग
अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि धार्मिक आयोजनों से हमारी संस्कृति और अनुशासन का बोध होता है। लेकिन मुजफ्फरनगर और अन्य हाइवे से आ रहे ये वीडियो किस प्रकार के अनुशासन का परिचय दे रहे हैं? सड़कों पर लेटना, वाहनों पर चढ़कर कूदना, डीजे की कानफोड़ू आवाज़ से मरीजों और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ाना और ट्रैफिक व्यवस्था को ठप कर देना—क्या यही हमारी महान संस्कृति है?
असली अनुशासन वह होता है जो दूसरों के अधिकारों का सम्मान करे। लेकिन यहाँ स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। रावण के वेश में या अन्य रूपों में सड़कों पर ड्रामा करते हुए और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए ये लोग समाज को किस दिशा में ले जा रहे हैं, इस पर आत्ममंथन करने की सख्त आवश्यकता है।
सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स कड़े शब्दों में यह मांग करता है कि आस्था और धर्म के नाम पर कानून व्यवस्था को खिलौना बनाने वाले इन उपद्रवियों पर बिना किसी राजनीतिक दबाव के कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। चाहे वह मुजफ्फरनगर की घटना हो या हाइवे पर चलने वाले अन्य अराजक तत्व, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़कें आवागमन के लिए हैं, किसी एक वर्ग के निजी अखाड़े या तमाशागाह के लिए नहीं।
यदि समय रहते इस बेलगाम भीड़तंत्र (Mobocracy) पर लगाम नहीं लगाई गई, तो वह दिन दूर नहीं जब देश में कानून का राज पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और अराजकता ही नया नियम बन जाएगी। देश के युवाओं को रोजगार, बेहतर शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है, न कि सड़कों पर इस प्रकार का नंगा नाच करने की। सरकार और प्रशासन को अपनी नींद तोड़नी होगी और यह साबित करना होगा कि देश में कानून सर्वोपरि है।

