बेंगलुरु में झील में सूटकेस के अंदर मिला बुजुर्ग महिला का शव, गहने गायब
बेंगलुरु के रामोहल्ली इलाके में एक सामान्य दिन था जब कुछ स्थानीय लोगों की नजर झील में तैरते एक सूटकेस पर पड़ी। उन्होंने पास जाकर देखा तो सूटकेस से साड़ी का एक हिस्सा बाहर झांकता दिखाई दिया। डर लगने पर उन्होंने तुरंत कुंबलगोडु पुलिस को फोन किया। पुलिस पहुंची और सूटकेस को पानी से बाहर निकाला। जब उसे खोला गया तो अंदर एक बुजुर्ग महिला का शव था। यह देखकर सब हैरान रह गए।
बेंगलुरु /21 जुलाई 2026 / अटल हिन्द डेस्क
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक बहुत ही दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शहर के बाहरी इलाके में स्थित रामोहल्ली झील में मंगलवार को एक सूटकेस तैरता हुआ मिला, जिसके अंदर एक 61 साल की बुजुर्ग महिला की लाश बंद थी। मृतका की पहचान चलाघट्टा इलाके की रहने वाली जयम्मा के रूप में हुई है, जो पिछले कुछ दिनों से लापता थीं।
पुलिस को शुरुआती जांच में शक है कि महिला की हत्या सिर्फ इसलिए की गई ताकि उनके सोने के गहने लूटे जा सकें।
कैसे हुई घटना की जानकारी?
मंगलवार के दिन झील के आसपास से गुजर रहे स्थानीय लोगों को पानी में एक लावारिस सूटकेस तैरता हुआ दिखाई दिया। जब लोगों ने ध्यान से देखा, तो सूटकेस का कुछ हिस्सा खुला हुआ था और उसमें से एक साड़ी का पल्लू बाहर लटक रहा था। अनहोनी का अंदेशा होते ही ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय कुंबलगोडु पुलिस स्टेशन को इसकी जानकारी दी।
सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। गोताखोरों और स्थानीय निवासियों की मदद से सूटकेस को पानी से बाहर निकाला गया। जब सूटकेस को खोला गया, तो अंदर का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया। सूटकेस में बुजुर्ग जयम्मा का शव ठूंसकर भरा गया था। लाश की हालत देखकर लग रहा था कि पानी और आवारा जानवरों की वजह से शरीर पर कई जगह नोचे जाने के निशान बन गए थे।
15 जुलाई से लापता थीं जयम्मा
पुलिस रिकॉर्ड और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, जयम्मा 15 जुलाई की दोपहर करीब 3:30 बजे किसी काम से अपने घर से निकली थीं। जब देर शाम तक वह वापस नहीं लौटीं, तो घर वालों को चिंता हुई। उन्होंने अपने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उन्हें काफी तलाशा, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। उनका मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा था।
हर तरफ से निराश होकर उनके बेटे ने 16 जुलाई को कुंबलगोडु थाने में अपनी माँ की गुमशुदगी (लापता होने) की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस और घरवाले लगातार उनकी तलाश कर रहे थे, लेकिन 21 जुलाई को झील में इस हालत में उनका शव बरामद हुआ।
गहने लूटने के लिए हत्या का शक
घटनास्थल पर जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि जयम्मा के गले से उनका सोने का मंगलसूत्र, हाथों की अंगूठियां और कान की बालियां गायब थीं। पुलिस का मानना है कि किसी जान-पहचान वाले या लुटेरों ने गहने हड़पने के इरादे से महिला को निशाना बनाया। हत्या करने के बाद सबूत मिटाने और पहचान छिपाने की नीयत से शव को एक सूटकेस में बंद किया और झील में फेंक दिया।
फिलहाल कुंबलगोडु पुलिस ने इस सिलसिले में हत्या और साक्ष्य छिपाने का मामला दर्ज कर लिया है। आसपास के इलाकों और झील की तरफ जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 15 जुलाई को जयम्मा आखिरी बार किसके साथ थीं और झील तक सूटकेस कौन लेकर आया था।
भारत में सूटकेस में लाश मिलने के चर्चित और प्रमुख मामले
भारत में अपराध का यह तरीका (हत्या करके शव को सूटकेस या ट्रॉली बैग में बंद करके फेंकना) पिछले कुछ सालों में काफी देखा गया है। सबूत मिटाने और शव को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए अपराधी अक्सर इस रास्ते को चुनते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे कई दिल दहला देने वाले मामले दर्ज किए गए हैं:
1. निक्की यादव हत्याकांड (दिल्ली/हरियाणा – फरवरी 2023)
क्या हुआ था: साहिल गहलोत नाम के युवक ने अपनी लिव-इन पार्टनर निक्की यादव की केबल तार से गला घोंटकर हत्या कर दी थी।
सूटकेस/फ्रिज का इस्तेमाल: हत्या करने के बाद साहिल ने निक्की के शव को एक कार में रखा और ढाबे पर लगे ढाबे के फ्रिज/ट्रंक में छिपाने की कोशिश की। बाद में शव को ठिकाने लगाने के लिए सूटकेस और बैग्स का सहारा लिया गया।
वजह: साहिल दूसरी लड़की से शादी कर रहा था, जिसका विरोध निक्की कर रही थी।
2. मान्या/मुस्कान हत्याकांड और ट्रॉली बैग केस (मथुरा, यूपी – नवंबर 2022)
क्या हुआ था: दिल्ली की रहने वाली 22 वर्षीय आयुषी चौधरी का शव उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे के पास एक लाल रंग के बड़े ट्रॉली बैग (सूटकेस) में बंद मिला था।
किसने की हत्या: जांच में पता चला कि आयुषी की हत्या उसके अपने पिता ने ही अपने घर में गोली मारकर की थी और इसमें मां ने भी मदद की थी।
वजह: परिवार की मर्जी के बिना शादी करना और देर रात तक घर से बाहर रहना। पिता ने लाश को सूटकेस में पैक किया और अपनी कार से ले जाकर एक्सप्रेसवे पर फेंक दिया।
3. श्रद्धा वालकर मामला और उससे मिलते-जुलते सूटकेस केस (दिल्ली – 2022)
क्या हुआ था: आफताब पूनावाला ने अपनी पार्टनर श्रद्धा की हत्या करके शरीर के 35 टुकड़े किए थे।
सूटकेस का इस्तेमाल: हालांकि इस मामले में शरीर के हिस्सों को फ्रिज में रखा गया था, लेकिन टुकड़ों को बाहर ले जाकर फेंकने के लिए बड़े बैग और सूटकेस का ही इस्तेमाल किया गया था। इस घटना के बाद देश में सूटकेस में शव बंद करके फेंकने की घटनाओं की एक बाढ़ सी आ गई थी।
4. मेरठ में सूटकेस में मिला महिला का शव (उत्तर प्रदेश – 2021)
क्या हुआ था: मेरठ के पास एक नाले में काले रंग का सूटकेस तैरता मिला था।
घटना: सूटकेस खोलने पर एक अज्ञात महिला का शव मिला, जिसके हाथ-पैर बांधकर सूटकेस में भरे गए थे। जांच में सामने आया कि अवैध संबंधों के चलते महिला की हत्या की गई थी और पहचान छिपाने के लिए उसे दूर नाले में फेंक दिया गया था।
5. मुंबई के माहिम बीच पर सूटकेस में लाश (महाराष्ट्र – 2019)
क्या हुआ था: मुंबई के माहिम बीच पर एक तैरता हुआ सूटकेस बहकर किनारे आया।
घटना: जब पुलिस ने सूटकेस खोला, तो उसमें एक पुरुष के शरीर के कटे हुए हिस्से (हाथ-पैर और धड़) मिले।
किसने की वारदात: जांच के बाद पता चला कि मृतक एक संगीत शिक्षक था। उसकी नाबालिग गोद ली हुई बेटी और उसके प्रेमी ने संपत्ति और उत्पीड़न से तंग आकर हत्या की थी। लाश के टुकड़े करके उन्हें सूटकेस में भरकर समुद्र में बहा दिया था।
6. बेंगलुरु में ही एक और घटना (कर्नाटक – 2023)
क्या हुआ था: बेंगलुरु के मल्लेश्वरम इलाके में एक महिला ने अपनी माँ की हत्या कर दी और लाश को एक सूटकेस में बंद करके सीधे पुलिस स्टेशन पहुँच गई।
वजह: पारिवारिक झगड़ों और रोज-रोज के क्लेश से तंग आकर बेटी ने यह कदम उठाया था।
अपराधी सूटकेस का सहारा क्यों लेते हैं?
पुलिस और अपराध विशेषज्ञों के मुताबिक, हत्या के बाद शव को सूटकेस में बंद करने के पीछे अपराधियों की मुख्य सोच यह होती है:
आसानी से ले जाना: शव को खुले में ले जाना नामुमकिन होता है। सूटकेस में पहिये (ट्रॉली) होते हैं, जिससे भारी से भारी वजन को आसानी से घसीटकर कार, ऑटो या ट्रेन तक ले जाया जा सकता है।
संदेह न होना: यात्रा के दौरान किसी के हाथ में सूटकेस देखकर कोई शक नहीं करता।
पहचान छिपाना और समय पाना: बंद सूटकेस के कारण बदबू बाहर आने में वक्त लगता है, जिससे अपराधी को भागने का पूरा समय मिल जाता है।

