पुरुषोत्तम मास में 30 वर्षों बाद बनने वाला सोमवती अमावस्या का संयोग अत्यंत दुर्लभ :
पं. रामकिशन महाराज
तोशाम/12 जून/विष्णु दत्त शास्त्री
सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस साल की पहली सोमवती अमावस्या अधिकमास के कृष्ण पक्ष में यानि 15 जून को पड़ रही है।
यह जानकारी देते हुए तोशाम के संकटमोचन मेहंदीपुर बालाजी दरबार के महंत पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान, व्रत और पूजा से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है, जोकि सोमवती अमावस्या अबकी बार अधिक मास अर्थात पुरुषोत्तम मास में 15 जून को है।

पुरुषोत्तम मास में 30 वर्षों बाद बनने वाला सोमवती अमावस्या का संयोग अत्यंत दुर्लभ और फलदायी…
पंडित रामकिशन महाराज का कहना था कि इस साल की पहली सोमवती अमावस्या अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 15 जून को है।
सभी अमावस्याओं में सोमवती अमावस्या का विशेष स्थान है क्योंकि इस दिन स्नान, दान, व्रत और पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है, अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या एक अत्यंत दुर्लभ और अत्यंत फलदायी संयोग है, जोकि अब लगभग 30 वर्षों के बाद बन रहा है।

यह तिथि 15 जून सोमवार को पड़ रही है, जोकि पूरे अधिकमास का समापन दिवस भी है। इस विशेष दिन स्नान, दान और व्रत से कई गुना अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।
सोमवती अमावस्या पर स्नान, दान और पूजा का मुहूर्त क्या है ?
पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि सोमवती अमावस्या की तारीख वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 14 जून रविवार को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से प्रारंभ होगी और यह अगले दिन 15 जून सोमवार को सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक मान्य रहेगी।
उन्होंने बताया कि ऐसे में उदयातिथि के आधार पर सोमवती अमावस्या 15 जून सोमवार को है। सोमवती अमावस्या का व्रत और स्नान-दान 15 जून सोमवार को किया जाएगा।
इस संयोग का विशेष महत्व अक्षय पुण्य…
पंडित रामकिशन महाराज का कहना था कि यह अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के दौरान किए गए अनुष्ठान, पूजा, और दान का फल साधारण अमावस्या की तुलना में कई गुना अधिक (अक्षय) माना जाता है। जिससे एक साथ मुख्यतः 5 फायदे होते हैं।
सौभाग्य में वृद्धि : सुहागन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिए व्रत रखती हैं।
पितृ दोष शांति : इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और वंश में वृद्धि होती है।
प्रमुख उपाय और विधिपीपल की परिक्रमा : सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। पेड़ की जड़ में कच्चा दूध मिश्रित जल चढ़ाएं और 108 बार परिक्रमा करते हुए सूत लपेटें।
शिव-पार्वती की आराधना : भगवान शिव और माता पार्वती का जलाभिषेक करें। मान्यता है कि इस दिन पति-पत्नी साथ मिलकर शिव-शक्ति की पूजा करें तो जीवन के सारे संकट दूर होते हैं।
दान-पुण्य : इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी श्रद्धानुसार दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
अमावस्या का ज्योतिषीय महत्व…
पंडित रामकिशन महाराज के अनुसार अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं। सूर्य अग्नि तत्व का प्रतीक है जबकि चंद्रमा शीतलता का। इस समय चंद्रमा का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे मन को एकाग्र करना आसान माना जाता है।
अमावस्या पर पीपल वृक्ष का महत्व…
पंडित रामकिशन महाराज ने कहा मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितरों का वास पीपल वृक्ष में होता है। इस दिन पीपल और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
सोमवती अमावस्या पर दान, कर्म करने से मिलेगा पुण्य…
पंडित रामकिशन महाराज के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन अन्न, दूध, फल, चावल, तिल और आंवला का दान करना शुभ माना गया है। गरीबों, संतों, साधुओं और ब्राह्मणों को भोजन कराना विशेष पुण्य देता है। पितरों का तर्पण करने से उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। उनका कहना था कि तिल मिला हुआ जल दक्षिण दिशा की ओर पितरों के नाम से अर्पित करें।
पीपल वृक्ष पर दूध चढ़ाकर सात बार परिक्रमा करें। पीपल के नीचे दीपक जलाएं। भगवान विष्णु की पूजा करें। पितरों की शांति के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें। पितरों का स्मरण करते हुए दान-पुण्य करें।



