धान सीजन को लेकर जाखल जंक्शन पर उमड़ा प्रवासी मजदूरों का सैलाब
जाखल /12 जून/ योगेश खनेजा
उत्तर भारत में धान की पारंपरिक रोपाई का सीजन शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। हरियाणा सरकार के नियमों के मुताबिक 15 जून से राज्य में धान की आधिकारिक रोपाई शुरू हो जाएगी।
इस कृषि सीजन को लेकर हरियाणा और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी हलचल देखी जा रही है। धान की रोपाई के इस महाकुंभ में अपनी भूमिका निभाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले प्रवासी मजदूरों का जाखल जंक्शन पर भारी जत्था पहुंचना शुरू हो गया है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी विशेष और नियमित ट्रेनों के माध्यम से हजारों की संख्या में मजदूर जाखल पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे स्टेशन परिसर में भारी चहल-पहल और रौनक लौट आई है।
जाखल जंक्शन उत्तर भारत के सबसे प्रमुख रेलवे जंक्शनों में से एक माना जाता है। धान रोपाई के मौसम में यह स्टेशन एक बड़े मानव संसाधन केंद्र के रूप में उभरता है, जहां से मजदूर पंजाब के संगरूर, लुधियाना, बठिंडा, मूनक, पातड़ा, सुनाम और पटियाला सहित कई प्रमुख धान उत्पादक इलाकों के लिए रवाना होते हैं।
वहीं, हरियाणा के स्थानीय क्षेत्रों जैसे जाखल, भूना, कुलां, टोहाना और फतेहाबाद के किसान भी अपने खेतों में धान की रोपाई के लिए सुबह से ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के साथ स्टेशन पर डेरा डाले हुए हैं।
मजदूरों की इस भारी आमद को देखते हुए रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने भी कमर कस ली है। स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। साथ ही मजदूरों के लिए पीने के साफ पानी, छांव और प्राथमिक चिकित्सा की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि भीषण गर्मी में उन्हें परेशानी न हो।
बरसों पुराना भरोसा और आपसी तालमेल
स्टेशन पर पहुंचे स्थानीय किसान कर्मजीत सिंह, गुरसेवक काला, बिंदर सिंह, सतगुरु सिंह, राजवीर सिंह इत्यादि किसानों ने बताया कि प्रवासियों और स्थानीय किसानों के बीच यह रिश्ता केवल मजदूरी का नहीं, बल्कि बरसों पुराने भरोसे का है।
उनके साथ काम करने वाले मजदूर हर साल बिना किसी व्यवधान के इसी समय यहां पहुंचते हैं। किसानों का कहना है कि इन अनुभवी मजदूरों के आने से धान रोपाई का कार्य बेहद सुगम और तेज हो जाता है। किसान स्टेशन से ही मजदूरों को अपनी गाड़ियों में बैठाकर सीधे अपने खेतों और डेरों की ओर लेकर जा रहे हैं,
जहां उनके रहने और खाने-पीने का अग्रिम प्रबंध किया गया है। जंक्शन पर उतरे बिहार से आए प्रवासी मजदूर राजेंद्र, अशोक, मंगल, गौरी शंकर, गोपाल और रामू ने बताया कि इस समय किसानों के साथ धान रोपाई का रेट लगभग 4200 रुपये प्रति एकड़ तय हुआ है। इस निश्चित दर से दोनों पक्षों में सहमति बनी है, जिससे काम बिना किसी मोलभाव के तुरंत शुरू हो रहा है।
हरियाणा सरकार की सख्त नीति और जल संरक्षण का प्रयास
एक तरफ जहां परंपरागत रोपाई के लिए मजदूरों की आवक जारी है, वहीं दूसरी तरफ हरियाणा सरकार अपनी सख्त जल संरक्षण नीति के तहत लगातार गिरते भूजल स्तर को बचाने के प्रयास में जुटी है।
‘हरियाणा उप-मृदा जल संरक्षण अधिनियम’ के तहत सरकार ने 15 जून से पहले पारंपरिक कद्दू विधि से रोपाई करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसके साथ ही सरकार भूजल को बचाने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीकों की तरफ मोड़ रही है।
राज्य सरकार पारंपरिक रोपाई को कम करने के लिए धान की सीधी बिजाई डीएसआर मशीन से तकनीक को बढ़ावा दे रही है। पारंपरिक विधि को छोड़कर आधुनिक डीएसआर तकनीक अपनाने वाले किसानों को सरकार की ओर से 4,500 रुपए प्रति एकड़ की वित्तीय प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में दी जा रही है।
इसके अलावा, राज्य की महत्वाकांक्षी ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना के तहत जो किसान धान की जगह कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें जैसे मक्का, कपास, दालें या सब्जियां उगाते हैं, उन्हें 8,000 रुपए प्रति एकड़ की बड़ी प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
इन सभी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों के लिए ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। सरकार की इन नीतियों और 4200 रुपए के रोपाई रेट के बीच इस बार किसान फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं और कृषि गतिविधियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं।
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